Ranchi: मां भद्रकाली के पावन दरबार में पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे के साथ राज्य के प्रदेश पदाधिकारी एवं चतरा जिले के विभिन्न प्रखंडों के निजी विद्यालय को संचालकों ने राज्य के खुशहाली, तरक्की और अमन चैन एवं झारखंड के शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मां भद्रकाली की पूजा अर्चना की। तत्पश्चात पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे के नेतृत्व में चतरा जिला के इटखोरी प्रखंड में विभिन्न प्रखंडों से उपस्थित निजी विद्यालयों के संचालकों की एक अति महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने किया एवं सभा का संचालन पासवा के प्रदेश महासचिव नीरज सहाय ने किया।

बैठक के प्रारंभ में पासवा के सभी सदस्यों ने पासवा के संरक्षक झारखंड के पूर्व वित्त मंत्री एवं वर्तमान लोहरदगा विधायक आदरणीय डॉक्टर रामेश्वर उरांव के जन्मदिन पर उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं उज्जवल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड के निजी विद्यालयों को संरक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने झारखंड सरकार और झारखंड प्रशासन के पदाधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि निजी विद्यालयों को धमकाना बंद करे सरकार और प्रशासन। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि जितना एक्सरसाइज निजी विद्यालयों के लिए लोग करते हैं उतना प्रयास अगर सरकारी विद्यालयों के लिए किया जाए तो शिक्षा जगत पर बड़ा उपकार होगा।

आलोक कुमार दूबे ने स्पष्ट किया कि गरीब से गरीब अभिभावक भी आज अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में ही भेजना चाहते हैं सरकारी विद्यालयों में खाना किताब ड्रेस फीस न के बराबर होने के बावजूद भी लोग अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ाना नहीं चाहते हैं इस पर चिंतन करने की जरूरत है।उन्होंने सरकार और प्रशासन से अनुरोध किया कि नेपाल की तरह झारखंड में भी सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी विद्यालय में पढ़ाना मैंडेटरी करें
महंगी किताबें और फीस रि -एडमिशन आदि के गलत और भ्रामक प्रचार पर झारखंड के निजी विद्यालयों का पक्ष रखते हुए आलोक कुमार दूबे ने बताया कि एक दो विद्यालयों को देखकर सारे विद्यालयों पर दोषारोपण करना बंद करें प्रशासन और सरकार; झारखंड के 90% से अधिक विद्यालयों में ना तो लिया जाता है रि एडमिशन और ना ही कोई है महंगी किताब।
उन्होंने झारखंड के निजी विद्यालयों की दयनीय स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि झारखंड के अधिकांश छोटे विद्यालय फ्री एडमिशन कर रहे हैं ना की रिएडमिशन; छोटे विद्यालयों को मासिक शुल्क तो समय पर मिल ही नहीं पाता महंगी फीस, महंगा किताब यह पूरी तरह से मिथ्या अवधारणा है।उन्होंने झारखंड सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों कर्मचारियों अभिभावकों बच्चों ने अगर सड़क का रास्ता देख लिया तो फिर स्थिति का आकलन किया जा सकता है ।
अतः वास्तव में झारखंड के निजी विद्यालय झारखंड के शिक्षण व्यवस्था की रीड हैं जिसमें लाखों दलित आदिवासी पिछड़े वर्ग के बच्चे बहुत ही सस्ते दर गुणात्मक शिक्षा प्राप्त करते हैं। और यही झारखंड के शिक्षा की गुणात्मकता को बचाए भी रखे हुए हैं वस्तुत वर्तमान समय में झारखंड के नीचे विद्यालयों को सहायता की आवश्यकता है किंतु कुछ मुट्ठी भर लोग जिनका शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है जानबूझकर झारखंड के निजी विद्यालयों को टारगेट कर रहे हैं ताकि वह झारखंड की सरकार को कमजोर कर सकें और यहां के शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो सके।
