Ranchi: भाजपा द्वारा अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत अमर शहीद स्थल भोगनाडीह, राजधानी रांची स्थित मोराबादी के सिदो कान्हू पार्क, प्रदेश कार्यालय सहित राज्य के सभी मंडलों में हूल क्रांति के अमर शहीद महानायक सिदो-कान्हो, चांद-भैरव, फूलो-झानो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी एवं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने मोराबादी स्थित सिदो कान्हू पार्क में सिदो-कान्हो की प्रतिमा पर श्रंद्धाजलि अर्पित कर जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए उनके अद्वितीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। जबकि प्रदेश कार्यालय में ‘हूल क्रांति’ के महानायकों के बलिदान दिवस पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।इसके अलावा भोगनाडीह सहित राज्य के सभी मंडलों में हूल क्रांति के महानायकों को पार्टी के विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धांजलि दी गई।

वहीं इस मौके पर झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि हूल दिवस, जनजातीय समुदाय के कड़े संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। आजादी की लड़ाई में झारखंड के जनजातीय समुदाय के महानायकों की उल्लेखनीय और अग्रणी भूमिका रही है। हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक है। 30 जून 1855 को भोगनाडीह की धरती से वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो के नेतृत्व में हजारों संथालों ने ब्रिटिश शासन, शोषण और अन्याय के विरुद्ध ‘हूल’ का शंखनाद किया। सिदो-कान्हो, चांद-भैरव, फूलो-झानो सहित हजारों सपूतों ने अपनी कुर्बानी दी है। यह जनआंदोलन जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ा गया, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। हूल क्रांति के महानायकों के अद्वितीय शौर्य, त्याग, बलिदान और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष को कभी भूलाया और बिसराया नहीं जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे तमाम आजादी के मतवालों और नायकों को उचित सम्मान देने का काम किया है जबकि विपक्षी पार्टियों ने उनका उपहास उड़ाने का काम किया है। प्रधान, मानकी, मुंडा को जो सुविधाएं भाजपा सरकार द्वारा दी गई, राज्य सरकार द्वारा उस अधिकार से उन्हें वंचित कर अपनी मानसिकता जाहिर करने का काम किया गया है।
भोगनाडीह में सरकार की तानाशाही रवैए पर भड़के आदित्य साहू
भोगनाडीह में राज्य सरकार के तानाशाही रवैए पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए इसे प्रशासन का अनावश्यक हस्तक्षेप बताया। उन्होंने कहा कि क्या अब आदिवासियों को अपने ही पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सरकार और प्रशासन की अनुमति लेनी होगी और बॉन्ड भरना पड़ेगा ? झारखंड सरकार का यह रवैया अंग्रेजी मानसिकता और हिटलरशाही नहीं तो क्या है?

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सूचना मिल रही है कि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर 50 से अधिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। यह आदिवासियों को डराने का प्रयास नहीं तो क्या है। पिछले साल भी हूल दिवस के अवसर पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस चलाए गए थे। उन्होंने कहा कि अधिक अहंकार होना पतन का कारण बनता है। झारखंड सरकार उसी राह पर है। जनजातीय संस्कृति एवं विरासत को मिटाने का सपना देखने वालों की जनता जल्द ही पूरी तरह अस्तित्व खत्म कर देगी। जो स्थिति है उससे तो यही लगता है कि झारखंड में एक और हूल क्रांति की आवश्यकता है।
अबुआ सरकार के कार्यकाल में आदिवासी भूमि को लूटा जा रहा हैं:बाबूलाल मरांडी
वहीं हूल दिवस के मौके पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संथाल परगना की वीरभूमि से वर्ष 1855 में ब्रिटिश शासन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध हूल आंदोलन का ऐतिहासिक बिगुल फूंका गया। सिदो मुर्मु, कान्हू मुर्मु, चांद मुर्मु, भैरव मुर्मु तथा वीरांगनाएं फूलो मुर्मु और झानो मुर्मु के नेतृत्व में संथाल समाज ने जल, जंगल, जमीन और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष का परिचय दिया। अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने वाला यह आंदोलन स्वतंत्रता, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए जनजागरण का प्रतीक बना। हूल दिवस के अवसर पर उन सभी अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभाव आज भी हम सभी को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 1855 के हूल उलगुलान के माध्यम से सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष कर उन्हें अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य किया था। इसके बाद संताल परगना क्षेत्र में भूमि बंदोबस्ती की जिम्मेदारी स्थानीय प्रधान व्यवस्था को सौंपने की परंपरा स्थापित हुई, जो लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन दुर्भाग्यवश, पिछले कुछ वर्षों में कथित अबुआ सरकार के कार्यकाल में आदिवासी भूमि को लूटा जा रहा हैं। घुसपैठियों को राज्य सरकार का संरक्षण मिल रहा है। रिम्स-2 के नाम पर आदिवासियों की उपजाऊ भूमि अधिग्रहण के प्रयास कर सरकार अंग्रेजों वाली मानसिकता का परिचय दे रही है।
सिद्धो और कान्हू के बलिदान दिवस, हुल दिवस का अपना ऐतिहासिक महत्व :कर्मवीर सिंह
वहीं पाकुड़ जिला में संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने हूल दिवस पर हूल क्रांति के नायकों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि 30 जून 1855 को अंग्रेजी हुकूमत और ज़मींदारों के खिलाफ प्रथम आदिवासी विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले सिद्धो और कान्हू के बलिदान दिवस हुल दिवस का अपना ऐतिहासिक महत्व है। यह पावन तिथि हम सबों को अपने राष्ट और अपनी मिट्टी की रक्षा के लिए मर-मिट जाने की प्रेरणा देती है।

इधर सिदो-कान्हो पार्क रांची में इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, पूर्व विधायक राम कुमार पाहन, महानगर अध्यक्ष वरुण साहू सहित भारतीय जनता पार्टी के जिला पदाधिकारी, मंडल पदाधिकारी, वरिष्ठ कार्यकर्तागणों ने भी वीर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया। इस दौरान प्रदेश कार्यालय में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश और मुख्य सचेतक नवीन जयसवाल सहित वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। वहीं पाकुड़ में श्रंद्धाजलि कार्यक्रम के अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय, प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी, जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू सहित कई भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
