Ranchi: भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास के आसपास जिस तरह से भारी संख्या में बैरिकेडिंग की गई है, उससे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर पूरे इलाके के आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, अभिभावकों, कर्मचारियों और राहगीरों को परेशानी में डाल देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। सड़कों पर जगह-जगह बैरिकेडिंग के कारण आवागमन बाधित हो रहा है और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
शोभा यादव ने कहा कि सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हो रही है जिनके बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाते हैं। सुबह के समय जब बच्चों को समय पर विद्यालय पहुंचना होता है, तब रास्तों पर अवरोध और यातायात की समस्या के कारण अभिभावकों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आम जनता ने क्या गलती की है, जिसके कारण उसे इस तरह की अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है?
उन्होंने कहा कि आज झारखंड के छात्र अपनी समस्याओं और अपने भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने का पूरा अधिकार है। उनकी बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, तो सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए, न कि उनके रास्ते में लगातार बैरिकेडिंग खड़ी करके उन्हें रोकने का प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री से मेरा सीधा सवाल है कि आखिर छात्रों से इतना भयभीत होने की क्या जरूरत है? यदि सरकार को लगता है कि छात्रों की मांगों में कोई तथ्य नहीं है, तो सरकार उनके साथ बैठकर बातचीत करे, उनकी बात सुने और तथ्यों के आधार पर जवाब दे। लोकतंत्र में संवाद किसी भी समस्या का सबसे बेहतर रास्ता है। बैरिकेडिंग, रास्ते बंद करना और आम जनता को परेशान करना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि छात्र और युवा किसी सरकार के विरोधी नहीं होते। वे राज्य का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना सरकार का दायित्व है। परीक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, रोजगार और पारदर्शिता जैसे विषयों पर युवाओं के मन में यदि सवाल हैं, तो उन सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है। युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनके साथ विश्वास का वातावरण बनाया जाना चाहिए।
प्रदेश प्रवक्ता ने सरकार से मांग किया है कि मुख्यमंत्री आवास के आसपास की अनावश्यक बैरिकेडिंग और उससे आम लोगों को हो रही परेशानियों की तत्काल समीक्षा की जाए। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, कर्मचारियों और आम नागरिकों के आवागमन को सुचारु बनाया जाए। साथ ही छात्रों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उनके साथ खुले मन से बातचीत की जाए और उनकी वास्तविक समस्याओं का समाधान निकालने की पहल की जाए।
उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को ऐसी सरकार चाहिए जो जनता के बीच रहे, युवाओं की बात सुने और समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से करे। मुख्यमंत्री आवास को किले में बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होंगी, छात्रों के सवालों का जवाब देने से ही समाधान निकलेगा। सरकार को डर और अवरोध की राजनीति छोड़कर संवाद, पारदर्शिता और जवाबदेही का रास्ता अपनाना चाहिए।
