Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा आज की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के कार्यकाल में झारखंड की आर्थिक स्थिति और राज्य के संसाधनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए, वह आज राज्य सरकार को वित्तीय प्रबंधन का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
आलोक दूबे ने कहा कि झारखंड का पहला बजट सरप्लस था, लेकिन रघुवर दास के शासनकाल के अंत तक राज्य का खजाना खाली हो गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि रघुवर दास के कार्यकाल में झारखंड के हितों से ज्यादा भाजपा और उसके केंद्रीय नेतृत्व के हितों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता यह सवाल पूछ रही है कि सत्ता से विदाई के समय राज्य की आर्थिक स्थिति क्या थी और उस दौर में राज्य के संसाधनों का किस तरह इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा कि आज रघुवर दास खनिज एवं खनन विकास से जुड़े कानून को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि इस कानून के खिलाफ झारखंड में उठ रही आवाज ने भाजपा नेतृत्व को बेचैन कर दिया है।कांग्रेस और विपक्षी दलों के व्यापक विरोध के कारण झारखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि झारखंड के जल-जंगल-जमीन और खनिज संपदा पर राज्य के अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
आलोक दूबे ने रघुवर दास के पुराने कार्यकाल को याद दिलाते हुए कहा कि यही वह सरकार थी जिसने वन अधिकार कानून में संशोधन का प्रयास किया था। कांग्रेस ने उस समय व्यापक जनदबाव और आंदोलन के माध्यम से इसका विरोध किया और अंततः वह प्रयास सफल नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी, मूलवासी और ग्रामीण समुदाय अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि रघुवर दास सरकार के समय *झारखंड की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े फैसले राज्यहित से अधिक दूसरे हितों को ध्यान में रखकर लिए गए।* उन्होंने बांग्लादेश को बिजली उपलब्ध कराने के लिए झारखंड की जमीन और संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड की जनता को यह जानने का अधिकार है कि राज्य के संसाधनों का वास्तविक लाभ किसे मिला।
आलोक दूबे ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में भी राज्य सरकार के राजस्व अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हुई थी। कोयले को छोड़कर राज्य सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों में राजस्व बढ़ाने के उपाय कर सकती है। इसके बावजूद भाजपा लगातार झारखंड की जनता को भ्रमित करने और राज्य सरकार को अस्थिर करने की राजनीति कर रही है।
रघुवर दास द्वारा अवैध कोयला कारोबार को लेकर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भाजपा को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के कई बड़े नेताओं पर अवैध कोयला कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं और रघुवर दास के कार्यकाल में ऐसे लोगों को राजनीतिक संरक्षण और बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिला, उनमें से कई आज सांसद और विधायक बनकर राजनीति कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, रघुवर दास को आज अवैध खनन और कोयला कारोबार की इतनी चिंता है तो उन्हें अपने शासनकाल का आईना भी झारखंड की जनता के सामने रखना चाहिए। आखिर उनके कार्यकाल में किन लोगों को संरक्षण मिला, किन लोगों का राजनीतिक कद बढ़ा और किन लोगों को टिकट देकर सदन तक पहुंचाया गया?*
चाईबासा, धनबाद और संथाल परगना में प्रदूषण एवं जलस्रोतों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए आलोक दूबे ने कहा कि *रघुवर दास जी के शासनकाल में अगर चाईबासा, धनबाद और संथाल परगना में सफेद पानी निकल रहा था, तो अचानक ऐसी कौन-सी दैवीय शक्ति आ गई कि वही पानी लाल और काला हो गया?* उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्रों में पर्यावरण, पानी और स्थानीय लोगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भाजपा को राजनीति करने के बजाय जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
आलोक दूबे ने कहा कि रघुवर दास की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर कई आरोप लगाए गए, लेकिन आरोप लगाने से पहले भाजपा को अपने शासनकाल का पूरा हिसाब झारखंड की जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तथ्यों के साथ जनता के बीच जाएगी और यह बताएगी कि किस सरकार ने झारखंड के अधिकारों की रक्षा की और किस सरकार ने राज्य के संसाधनों पर दूसरे हितों को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा झारखंड की जनता की संपत्ति है। केंद्र सरकार कानून बनाकर राज्य के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास करेगी तो कांग्रेस सड़क से सदन और झारखंड से दिल्ली तक लोकतांत्रिक संघर्ष करेगी।
आलोक दूबे ने कहा कि अब झारखंड की जनता तय करेगी कि उसे अपने खनिज, जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा करने वाली राजनीति चाहिए या राज्य के संसाधनों पर नियंत्रण की राजनीति।
