Ranchi:झारखंड भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि छात्र आंदोलन से जुड़े युवाओं पर हत्या के प्रयास से संबंधित गंभीर प्रावधानों सहित आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज किया जाना अत्यंत चिंताजनक है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों के विरुद्ध इतनी गंभीर धाराएं लगाने का आधार क्या था।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और छह अन्य राज्यों ने हाल ही में दिल्ली के छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में सर्वोच्च न्यायालय जाकर आईए फाइल करके राहत देने के उदाहरण प्रस्तुत किया। ऐसे में झारखंड सरकार विधि-सम्मत प्रक्रिया के तहत इन प्रकरणों की समीक्षा अभियोजन वापस लेने अथवा अन्य न्यायिक राहत के लिए हाईकोर्ट में पहल क्यों नहीं कर रही है। सरकार की निष्क्रियता उसकी प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि उच्च न्यायालय में राज्य सरकार की पैरवी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।सरकार ने एक आदेश से दो दर्जन परीक्षाओं के परिणाम को रद्द कर दिया।पर आदेश इतना कमजोर बनाया की नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के तहत उच्च न्यायालय से राहत मिल गया। सरकार ने याचिका के डिफेक्टिव होने पर भी उसका विरोध नहीं किया।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सरकार के द्वारा परीक्षा रद्द करने पर मंत्रियों ने धरना स्थल पर छात्रों के साथ डांस तक किया। जूस भी पिलाया।परंतु यह सब आईवॉश और नाटक था। उस समय उन्होंने घोषणाएं भी की थी कि छात्रों से मुकदमे हटेंगे। लेकिन आज तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई ।इसीलिए सरकार की नीयत में भारी खोट है।
