Ranchi : राजधानी रांची के डोरंडा स्थित छप्पन सेट में शनिवार को शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति, छप्पन सेट, डोरंडा की ओर से कलश स्थापना के पावन अवसर पर भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया और पूरे क्षेत्र को माता के जयकारों से गुंजायमान कर दिया।

 

वहीं छप्पन सेट स्थित दुर्गा मंडप से यह भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण और शंखनाद के साथ हुई। महिलाएं सिर पर कलश धारण कर कतारबद्ध तरीके से चल रही थीं। शोभायात्रा छप्पन सेट मंडप से निकलकर गोरखा चौक, अंबेडकर चौक और विवेकानंद चौक के रास्ते होते हुए डोरंडा के प्रसिद्ध बटन तालाब पहुंची। इस दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर शोभायात्रा का स्वागत किया। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने भी शोभायात्रा में शामिल महिलाओं का उत्साह बढ़ाया।

बटन तालाब पहुंचकर महिलाओं ने विधि-विधान के साथ पवित्र जल भरा। पंडितों ने मंत्रोच्चारण के बीच तालाब के जल को पूजित किया और फिर महिलाओं ने अपने कलश में वह जल भरा। इसके बाद सभी महिलाएं कलश को अपने माथे पर धारण कर भजन-कीर्तन, “जय माता दी” और “माँ दुर्गा की जय” के जयकारों और ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच वापस प्रस्थान कीं।

 

शोभायात्रा बटन तालाब से राजेंद्र चौक और गोरखा चौक होते हुए पुनः छप्पन सेट स्थित दुर्गा मंडप पहुंची, जहां पंडित उदय शंकर मिश्रा के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान के साथ कलश स्थापित किया गया। इसके साथ ही शारदीय नवरात्र की विधिवत शुरुआत हुई और माँ दुर्गा का आह्वान करते हुए पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने शरबत और प्रसाद की व्यवस्था भी की थी।

 

धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है कलश शोभायात्रा : आलोक कुमार दूबे

इस अवसर पर समिति के मुख्य संरक्षक एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कलश स्थापना के पावन अवसर पर पवित्र जल लेकर निकाली जाने वाली शोभायात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। कलश में पवित्र जल स्थापित कर माँ दुर्गा का आह्वान किया जाता है तथा उनसे सुख, शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की जाती है।

 

आलोक दूबे ने कहा, “धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे, सेवा और सद्भाव में भी उसका वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है। आज जब सैकड़ों महिलाएं एक साथ एक ही रंग के वस्त्रों में, एक ही उद्देश्य के लिए निकलीं, तो यह हमारी सामाजिक एकता का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह दृश्य बताता है कि सनातन संस्कृति कितनी समृद्ध है।”

 

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए माँ दुर्गा से प्रार्थना की कि वे सभी के जीवन से दुःख, संकट और निराशा दूर करें तथा झारखंड सहित पूरे देश में सुख-समृद्धि और सामाजिक सद्भाव बनाए रखें। उन्होंने कहा कि माँ दुर्गा की आराधना के साथ-साथ हमें जलस्रोतों की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प भी लेना चाहिए। बटन तालाब जैसे जलस्रोत हमारी धरोहर हैं, इन्हें स्वच्छ रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

 

कलश स्थापना हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण अंग : कपिलदेव सिंह

 

समिति के संरक्षक कपिलदेव सिंह ने कहा कि कलश स्थापना हमारी प्राचीन धार्मिक परंपरा, श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण अंग है। कलश शोभायात्रा के माध्यम से समाज के लोग एक साथ जुड़ते हैं और सामूहिक रूप से माँ दुर्गा की आराधना करते हैं। ऐसे धार्मिक आयोजन हमारी नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ आपसी सहयोग, सद्भाव और एकता की भावना को भी मजबूत करते हैं।

कपिलदेव सिंह ने कहा कि छप्पन सेट की दुर्गा पूजा केवल एक पूजा नहीं, बल्कि पूरे डोरंडा क्षेत्र की एकता का प्रतीक है। यहां सभी जाति और वर्ग के लोग मिलकर पूजा का आयोजन करते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से नवरात्र के दौरान श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ पूजा में भाग लेने तथा समाज में प्रेम और भाईचारा बनाए रखने की अपील की।

 

कलश देवी-शक्ति के आह्वान का प्रतीक : गौतम दूबे

 

समिति के अध्यक्ष गौतम दूबे उर्फ गोपी ने कहा कि कलश देवी-शक्ति के आह्वान और मंगलमय शुरुआत का प्रतीक है। नवरात्र में कलश स्थापना के साथ ही माँ दुर्गा की नौ दिनों तक चलने वाली आराधना प्रारंभ होती है। श्रद्धालुओं का एक साथ भजन-कीर्तन, जयकारों और पूजा-अर्चना के साथ पवित्र जल लाना धार्मिक उत्साह, सामूहिक सहभागिता और सामाजिक एकता को दर्शाता है।

 

गौतम दूबे ने बताया कि इस वर्ष पूजा पंडाल को विशेष रूप से सजाया जा रहा है और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को नवरात्र की शुभकामनाएँ देते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों, विशेषकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया।

 

माँ शैलपुत्री की आराधना से हुई नवरात्र की शुरुआत

 

समिति के मीडिया प्रभारी मेहुल दूबे ने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जा रही है। पूजा मंडप में प्रतिदिन सुबह 7 बजे और शाम 7 बजे आरती होगी। पंडित उदय शंकर मिश्रा के मार्गदर्शन में यजमान मनीष कुमार दूबे श्रद्धालुओं की ओर से विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराएंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से पूजा और आरती में शामिल होने की अपील की। साथ ही बताया कि सप्तमी, अष्टमी और नवमी को विशेष भोग और भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।

 

कलश शोभायात्रा एवं कलश स्थापना के अवसर पर समिति के मुख्य संरक्षक आलोक कुमार दूबे, संरक्षक कपिलदेव सिंह, अध्यक्ष गौतम दूबे, शोभा सिंह, रितेश सिंह, मनोज सिंह, शशिकांत, महेंद्र प्रसाद, मेहुल दूबे, गोपाल तिवारी, दिलीप पांडे, कमलेश झा, शीला देवी, कुसुम देवी, सर्वेश कुमार, रंजू पांडे, गुड़िया सिंह, प्रियंका देवी, रूबी सिंह, मोना कुमारी, दीपा कुमारी, पूजा कुमारी, अश्विनी कुमार, विजय गुप्ता, दीपक ठाकुर, रोहित कुमार और अमोल कुमार सहित समिति के अनेक सदस्य एवं सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे।

 

डोरंडा के सभी पंडाल करेंगे समन्वय के साथ काम

 

कलश शोभायात्रा में डोरंडा क्षेत्र के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और धार्मिक उत्साह के साथ अपनी सहभागिता निभाई। यह एकता का अनूठा उदाहरण था।

 

इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया कि रांची महानगर दुर्गा पूजा समिति के नेतृत्व में डोरंडा क्षेत्र के सभी पूजा पंडाल आपसी समन्वय के साथ पूजा का संचालन करेंगे तथा प्रशासन द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करेंगे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और पूजा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

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