Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार में चार सप्ताह के दौरान 51 अरब डॉलर की कथित गिरावट को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने के लिए लगातार विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचे जा रहे हैं, तो सरकार को देश की जनता के सामने इसकी वास्तविक स्थिति और आर्थिक प्रभाव स्पष्ट करना चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार लगातार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और भारतीय रुपये को स्थिर बताने का दावा करती रही है। लेकिन यदि रुपये की गिरावट को धीमा करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना पड़ रहा है, तो यह सरकार के आर्थिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि चमकाने और सरकार की आर्थिक विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश में देश के व्यापक आर्थिक हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। किसी भी सरकार की प्राथमिकता अपनी छवि बचाना नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, रुपये की स्थिरता बनाए रखना और आम जनता के हितों की रक्षा करना होना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि रुपये के कमजोर होने का असर केवल विदेशी मुद्रा बाजार तक सीमित नहीं रहता। इससे आयात महंगा हो सकता है, पेट्रोलियम पदार्थों की लागत बढ़ सकती है और विदेश से आयात होने वाली वस्तुओं एवं कच्चे माल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं, कारोबारियों और उद्योगों पर पड़ने की आशंका रहती है।
आलोक कुमार दूबे ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं? रुपये को स्थिर रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को कितने डॉलर बेचने पड़े हैं? और इस हस्तक्षेप का देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल अपने आप में गलत नहीं है, क्योंकि केंद्रीय बैंक विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। लेकिन यदि भंडार में बड़ी गिरावट हो रही है, तो सरकार और संबंधित संस्थाओं को पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि देश की जनता को प्रचार और वास्तविक आर्थिक स्थिति के बीच अंतर समझने का अधिकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि से ज्यादा महत्वपूर्ण देश की आर्थिक मजबूती, रुपये की स्थिरता और करोड़ों भारतीयों का भविष्य है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट, डॉलर की बिक्री और रुपये की विनिमय दर को लेकर देश के सामने तथ्यात्मक स्थिति रखी जाए तथा अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी जाए।
