Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कांग्रेस और राहुल गांधी के जनाधार पर की गई टिप्पणी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी झूठे नैरेटिव गढ़ने और विपक्ष पर अनर्गल आरोप लगाने की राजनीति बंद करे। कांग्रेस के जनाधार की चिंता करने वाले अमित शाह पहले अपनी पार्टी के कामकाज, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के बीच उठ रहे सवालों का जवाब दें। कांग्रेस को नसीहत देने से पहले भाजपा को यह बताना चाहिए कि चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची की निष्पक्षता और वोट चोरी के आरोपों पर वह स्पष्ट जवाब देने से क्यों बचती है।
आलोक दूबे ने कहा कि भाजपा नेताओं की राजनीति का आधार ही विपक्ष को बदनाम करना और असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना बन गया है। जब कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों का सवाल उठाती है, तो भाजपा जवाब देने के बजाय कांग्रेस के जनाधार पर भाषण देने लगती है। उन्होंने कहा कि सवाल पूछना लोकतंत्र में विपक्ष का अधिकार है और उन सवालों का जवाब देना सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी। कांग्रेस को EVM का रोना रोने वाली पार्टी बताने से चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाले सवाल समाप्त नहीं हो जाते।
आलोक दूबे ने कहा कि भाजपा खुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताती है, लेकिन उसे यह भी समझना चाहिए कि लोकतंत्र में किसी पार्टी का बड़ा संगठन होना उसकी हर बात को सही साबित नहीं करता। जनता महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, सामाजिक असमानता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है। इन सवालों से ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस को निशाना बनाना भाजपा की पुरानी रणनीति बन गई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक कांग्रेस की स्थिति पर टिप्पणी करने वाले भाजपा नेता अपने राजनीतिक इतिहास को भी याद रखें। देश की राजनीति में किसी दल का प्रभाव स्थायी नहीं होता। जनता समय-समय पर सरकारें बदलती है और सत्ता में बैठे दलों को भी विपक्ष में बैठना पड़ता है। कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर भाजपा का प्रमाणपत्र जरूरी नहीं है। जनता का फैसला ही अंतिम होता है और लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को जनता के बीच अपनी नीतियों तथा कामकाज के आधार पर समर्थन मांगने का अधिकार है।
आलोक कुमार दूबे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वोट चोरी और चुनावी अनियमितताओं को लेकर उठने वाले सवालों को राजनीतिक बयानबाजी से दबाया नहीं जा सकता। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित चुनावी व्यवस्था से जुड़े सभी संवैधानिक पदाधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रत्येक सवाल का जवाब तथ्यों, पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादा के अनुरूप दें। यदि किसी राजनीतिक दल या नागरिक को मतदाता सूची अथवा चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाना चाहिए।
आलोक दूबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को विपक्ष पर आरोप लगाने से पहले लोकतंत्र में असहमति के सम्मान और निष्पक्ष चुनाव की जिम्मेदारी को समझना चाहिए। सत्ता किसी की स्थायी जागीर नहीं है और न ही लोकतंत्र में सवाल पूछने का अधिकार किसी सरकार की कृपा पर निर्भर करता है। भाजपा को यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि विपक्ष को बदनाम करके जनता के सवालों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश के संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी। भाजपा जितना चाहे कांग्रेस पर आरोप लगाए, लेकिन जनता को महंगाई, बेरोजगारी और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर जवाब चाहिए। लोकतंत्र में जनता का वोट सबसे बड़ी ताकत है, और उस वोट की विश्वसनीयता पर उठने वाले सवालों का जवाब तंज से नहीं, तथ्यों और पारदर्शिता से दिया जाना चाहिए।
