Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा के नेता बाबूलाल मरांडी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुणगान किए जाने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कंठी-माला लेकर सुबह-शाम 108 बार प्रधानमंत्री का नाम जपने से देश की मूल समस्याएं समाप्त नहीं होंगी। प्रधानमंत्री की प्रशंसा करने से भाजपा जनता के बुनियादी सवालों से बच नहीं सकती।
आलोक दूबे ने कहा कि आज देश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर जवाब चाहती है। चीन की गतिविधियों, विदेश नीति की प्रभावशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों पर भी केंद्र सरकार को देश के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, NEET परीक्षा में पेपर लीक की घटनाओं और चुनावी प्रक्रिया में कथित वोट चोरी जैसे मुद्दों ने छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों के बीच गंभीर चिंता पैदा की है। SIR के माध्यम से साढ़े तीन करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने के आरोपों पर भी पारदर्शी स्पष्टीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं कटना चाहिए, क्योंकि मताधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी रक्षा करना निर्वाचन व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
आलोक दूबे ने कहा कि आज छात्र, युवा और नौजवान अपने भविष्य, रोजगार तथा लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इन सवालों पर देश के सामने जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार की ओर से अपेक्षित जवाब नहीं मिल रहा है। सरकार को सवालों से बचने के बजाय तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा झारखंड में डबल इंजन की सरकार का दावा करती रही है, लेकिन जनजातीय समाज के अधिकारों, सम्मान और हितों से जुड़े सवालों पर उसे अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। झारखंड की जनता जानना चाहती है कि जनजातीय समाज से किए गए अपने समय में कितने वादों पूरे किए थे।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि पहलगाम, पुलवामा और गोधरा जैसी गंभीर घटनाओं से जुड़े सवालों पर भी तथ्यों और जवाबदेही के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और सांप्रदायिक सद्भाव जैसे विषय राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जिम्मेदार जवाबदेही से जुड़े हैं।
भाजपा नेताओं को प्रधानमंत्री का गुणगान करने के बजाय महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा में पारदर्शिता, मताधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी केवल अपनी उपलब्धियों का प्रचार करना नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह रहना भी है।
आलोक दूबे ने कहा कि देश की जनता को नारों और प्रशंसा से अधिक अपने भविष्य, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों की चिंता है। जनता के सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है और इन सवालों से मुंह मोड़कर भाजपा अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती।
