Ranchi: प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए सवालों का समर्थन करते हुए कहा कि *देश के लोकतंत्र और शिक्षा व्यवस्था के लिए यह बेहद गंभीर स्थिति है कि एक ओर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन के अंदर अपनी बात रखने से रोका जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अपने अधिकार और न्याय की मांग कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई की जा रही है।*
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं, नाबालिग बच्चियों और महिलाओं के साथ जिस तरह की कथित पुलिस ज्यादती हुई, वह लोकतांत्रिक देश के लिए शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान *पैलेट गन से किए गए वार में कई छात्रों की आंखों और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि घायल छात्रों के उपचार और चिकित्सकीय जांच से भी चोटों की गंभीरता सामने आई है।*
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने बिल्कुल सही सवाल उठाया है कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस पूरे प्रकरण का समाधान नहीं है। शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन से उन सवालों का जवाब नहीं मिलता कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदारी किसकी है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश किस स्तर से दिया गया।
आलोक कुमार दूबे ने कहा, छात्रों पर गोली-पैलेट चलाने, लाठीचार्ज करने और महिलाओं एवं नाबालिग बच्चियों के साथ कथित बर्बरता की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। गृह मंत्री के अधीन पुलिस प्रशासन होने के कारण यदि आरोप सीधे गृह मंत्रालय की भूमिका और जिम्मेदारी पर उठ रहे हैं, तो उसी व्यवस्था के रहते निष्पक्ष जांच पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्राओं पर नुकीली वस्तुओं से हमला किया गया तथा कुछ *भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों पर भी लाठी लेकर प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के आरोप सामने आए हैं।* उन्होंने कहा कि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषी चाहे किसी भी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़े हों, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि *राहुल गांधी ने छात्रों की तीन मूलभूत मांगों—जवाबदेही, दोषियों पर कार्रवाई और प्रधानमंत्री की ओर से छात्रों से माफी—को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया है। कांग्रेस पार्टी छात्रों के साथ खड़ी है और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, लोकतांत्रिक तरीके से उनकी आवाज उठाती रहेगी।
उन्होंने कहा कि यह केवल NEET या किसी एक परीक्षा का मामला नहीं है। यह देश के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और लोकतंत्र में युवाओं की आवाज के सम्मान का सवाल है। सरकार को छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को सामने लाना चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि संसद के अंदर विपक्ष की आवाज और सड़क पर छात्रों की आवाज—दोनों को दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। सरकार को दमन का रास्ता छोड़कर संवाद, जवाबदेही और न्याय का रास्ता अपनाना चाहिए।
