Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा JPSC और JSSC के मुद्दे पर दिखाई जा रही अचानक की सक्रियता पूरी तरह राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण है। जिन नेताओं ने वर्षों तक झारखंड में सत्ता चलाई, वे आज युवाओं के सबसे बड़े हितैषी बनने का नाटक कर रहे हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भाजपा पूरी तरह बौखला गई है। देशभर में परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच अपने ही मंत्री का इस्तीफा होने के बाद भाजपा अब झारखंड के युवाओं के मुद्दों पर राजनीति कर अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और अर्जुन मुंडा को पहले यह बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में भर्ती प्रक्रियाओं, नियुक्तियों और युवाओं के रोजगार के लिए क्या ठोस व्यवस्था की गई थी। वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद लाखों युवाओं को रोजगार के लिए भटकना पड़ा। आज वही भाजपा युवाओं के कंधे पर राजनीति करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि यदि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में कहीं भी अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत जांच हो तथा दोषी कोई भी हो, उसे कठोर सजा मिले। लेकिन भाजपा का उद्देश्य न्याय नहीं, बल्कि हर मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाकर राज्य में भ्रम और अस्थिरता फैलाना है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा नेताओं को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास का भी आत्ममंथन करना चाहिए। झारखंड की जनता जानती है कि भाजपा ने वर्षों तक राज्य में सरकार चलाई, लेकिन युवाओं को स्थायी रोजगार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और मजबूत संस्थागत सुधार देने में असफल रही।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस युवाओं के अधिकार, पारदर्शिता और न्याय के साथ खड़ी है, लेकिन भाजपा को युवाओं के भविष्य पर राजनीति बंद कर रचनात्मक सुझाव देने चाहिए। झारखंड की जनता अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि जवाबदेही चाहती है।
