Ranchi : न्यू ऑक्सफोर्ड स्कूल, पिठोरिया (कांके) में पासवा के 50 लाख पौधारोपण अभियान के अंतर्गत 500 पौधों का सफलतापूर्वक रोपण किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य राशीद अंसारी, उप प्राचार्य अल्ताफ अंसारी पासवा वॉलिंटियर विद्या कुमारी उप-प्रधानाध्यापक फैयाज खान, रतन नाग,नुरुल्लाह अंसारी, नुसरत जहां,तबस्सुम खातून, हाजिना खातून,पूर्णिमा कुमारी, वंशिका मुंडा, शफीक अंसारी, मिनहाज अंसारी, मुसर्रत फातिमा, जीनत कौशर, सक्रिय भागीदारी रही।

पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय को हरियाली का केंद्र बनाकर विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण की भावना विकसित करनी होगी। उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से इस अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि पासवा का 50 लाख पौधारोपण अभियान पूरे देश में निरंतर गति पकड़ रहा है और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण का यह जनआंदोलन और अधिक मजबूत होगा। वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण मिल सके।

प्राचार्य राशीद अंसारी ने कहा

विद्यालय केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का भी माध्यम है। पासवा के 50 लाख पौधारोपण मिशन एवं दैनिक भास्कर के ‘एक पेड़, एक ज़िंदगी’ अभियान से जुड़कर 500 पौधों का रोपण करना हमारे लिए गर्व की बात है। हम सभी विद्यार्थियों को इन पौधों के संरक्षण का संकल्प भी दिला रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।

वही उप प्राचार्य अल्ताफ अंसारी ने कहा

पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत विद्यालय से होनी चाहिए। पौधारोपण के साथ-साथ उनकी नियमित देखभाल भी हमारी प्राथमिकता होगी। हम विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए ऐसे अभियान निरंतर चलाते रहेंगे।

पासवा वॉलिंटियर विद्या कुमारी ने कहा

पासवा के 50 लाख पौधारोपण मिशन से जुड़कर समाज और पर्यावरण के लिए योगदान देना हमारे लिए गर्व की बात है। हमारा प्रयास रहेगा कि लगाए गए सभी पौधों का नियमित संरक्षण हो और अधिक से अधिक लोग इस हरित अभियान से जुड़कर पर्यावरण बचाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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