Ranchi: प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अप्रासंगिक बताने से पहले सुदेश महतो को अपने राजनीतिक अस्तित्व और जनाधार पर आत्ममंथन करना चाहिए। जनता ने जिन ताकतों को बार-बार नकार दिया है, वे आज मुख्यमंत्री की प्रासंगिकता का प्रमाणपत्र बांट रही हैं।

आलोक दूबे ने कहा कि लोकतंत्र में मुख्यमंत्री से मिलने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाना आसान है, लेकिन शासन की पूरी व्यवस्था को केवल मुलाकात के आधार पर आंकना हास्यास्पद है। सरकार में मुख्य सचिव समेत पूरी प्रशासनिक व्यवस्था इसलिए होती है कि जनहित से जुड़े ज्ञापनों और शिकायतों पर संस्थागत स्तर पर कार्रवाई हो। मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपना किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के ध्वस्त होने का प्रमाण नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मामलों में सरकार ने जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। सीआईडी की कार्रवाई को राजनीतिक रंग देने के बजाय सुदेश महतो को जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने देना चाहिए। यदि किसी सरकारी कर्मचारी पर गंभीर आरोप हैं तो जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक निष्कर्ष निकालना न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक मर्यादा दोनों के खिलाफ है।

आलोक दूबे ने कहा कि विपक्ष को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन सवालों के नाम पर भ्रम फैलाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। हेमंत सोरेन सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है और हर गंभीर मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

उन्होंने सुदेश महतो से पूछा कि जब वे सत्ता में थे तब क्या विपक्ष और जनता के हर प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से तत्काल मुलाकात मिलती थी? क्या उस समय प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की व्यवस्था समाप्त हो गई थी? राजनीति में दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।

आलोक दूबे ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अप्रासंगिक नहीं, बल्कि झारखंड की जनता के जनादेश से मजबूत हैं। अप्रासंगिकता की चिंता उन लोगों को करनी चाहिए जिनकी राजनीति लगातार जनता के सवालों से कटती जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!