Ranchi: प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड में संचालित कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थान भ्रामक विज्ञापनों, बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले चयन के दावों और सफलता की अधूरी तस्वीर पेश कर विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को गुमराह कर रहे हैं।
आलोक दूबे ने कहा कि कई कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों में बड़े-बड़े Selection Results, टॉपरों की तस्वीरें, रैंक एवं सफलता के दावे किए जाते हैं। यदि इन दावों की वास्तविकता की निष्पक्ष जांच हो तो कई गंभीर सवाल सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि विज्ञापनों में किए जा रहे दावे पूरी तरह सही हैं तो देशभर की सीमित मेडिकल, इंजीनियरिंग, यूपीएससी सहित अन्य प्रतिष्ठित परीक्षाओं की सीटें अकेले झारखंड के विद्यार्थियों से ही भर जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्थिति यह है कि कई विद्यार्थियों को नियमित स्कूली शिक्षा से दूर कर नॉन-स्कूलिंग के लिए प्रेरित अथवा विवश किया जाता है, ताकि वे पूरी तरह कोचिंग पर निर्भर रहें। डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य प्रतिष्ठित करियर का सपना देखने वाले अभिभावक अपनी जीवनभर की जमा पूंजी तक दांव पर लगाकर कोचिंग संस्थानों पर खर्च करते हैं। लेकिन सफलता नहीं मिलने पर कई विद्यार्थी मानसिक दबाव, तनाव और निराशा का सामना करते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं सामने आती रही हैं, जिस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
आलोक दूबे ने कहा कि जेपीएससी एवं जेएसएससी-सीजीएल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर भी विद्यार्थियों के बीच कोचिंग संस्थानों द्वारा किए गए दावों और प्रचार की जांच होनी चाहिए। परीक्षा की तैयारी, चयन की संभावना, रिजल्ट और कथित सफलता के आंकड़ों को लेकर विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को किस तरह गुमराह किया गया, इसकी स्वतंत्र जांच हो। उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षा की अनिश्चितता को छिपाकर विद्यार्थियों को सफलता की गारंटी का सपना दिखाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को बेहतर भविष्य देना है, सफलता के नाम पर उन्हें मानसिक और आर्थिक दबाव में डालना नहीं। “100% Selection” और “Guaranteed Rank/Selection” जैसे दावों की भी सत्यता जांची जानी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने बताया कि उन्होंने 26 अगस्त को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुधित्य कुमार सोनू को पत्र देकर रांची के प्रमुख कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों, चयन संबंधी दावों, फीस, हॉस्टल, रिफंड पॉलिसी तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी।
उन्होंने नगर निगम द्वारा कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि कार्रवाई केवल विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों, भ्रामक दावे करने वालों और विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव बनाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों की नियमित स्कूली शिक्षा, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
