Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सह झारखंड प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल के उस बयान पर जोरदार पलटवार किया है, जिसमें पटेल ने झामुमो-कांग्रेस सरकार पर आदिवासियों को बरगलाने का आरोप लगाया था। दूबे ने कहा कि आदिवासियों की आवाज उठाना बरगलाना नहीं, बल्कि उनके हक और सम्मान की लड़ाई है, और भाजपा को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपना हिसाब देना चाहिए।

आलोक दूबे ने कहा, “मध्यप्रदेश में आदिवासी परिवारों, छात्रों और विस्थापितों की पीड़ा को सामने लाने वाले राहुल गांधी के प्रयासों और झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा आदिवासी भाई-बहनों के सम्मान और विकास के लिए किए जा रहे कामों को बरगलाना कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा नेताओं को आरोप लगाने से पहले यह देखना चाहिए कि वह स्वयं आदिवासी समाज के लिए क्या कर रही है।”

आदिवासी परिवारों के दुख में शामिल होना राजनीति नहीं, मानवीय संवेदना है – आलोक दूबे

आलोक दूबे ने कहा कि राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के बालाघाट में जाकर बैगा आदिवासी समुदाय के उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने बीमारी और सरकारी उपेक्षा के कारण अपने 30 से अधिक मासूम बच्चों को खो दिया। बीमारी और सरकारी उपेक्षा के कारण अपने मासूम बच्चों को खो चुके आदिवासी परिवारों के बीच जाकर उनके दुख में सहभागी बनना, उनकी आवाज सुनना और उन्हें यह भरोसा दिलाना कि वे अकेले नहीं हैं, राजनीति नहीं बल्कि मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी है। भाजपा सरकार को तो इस पर शर्म आनी चाहिए कि उनके राज में 30 से अधिक आदिवासी बच्चे काल के गाल में समा गए। स्वास्थ्य व्यवस्था कहां है?

उन्होंने कहा कि इसी तरह केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित हजारों आदिवासी परिवार विस्थापन के दर्द से जूझ रहे हैं। उनकी जमीन छीनी जा रही है, पुनर्वास नहीं हो रहा है। उनकी समस्याएं गंभीर हैं, लेकिन भाजपा सरकार सुनने को तैयार नहीं है।

इंदौर में छात्रों की गूंज – आदिवासी छात्रों ने उठाए थे ज्वलंत सवाल

आलोक दूबे ने कहा कि इंदौर में ‘छात्रों की गूँज’ कार्यक्रम के दौरान आदिवासी छात्रों ने जो सवाल उठाए थे, वे झारखंड सहित पूरे देश के आदिवासी युवाओं के सवाल हैं।छात्रों ने स्कूलों की कमी, बदहाल कॉलेज, छात्रावासों की खराब व्यवस्था, भोजन की समस्या, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और आरक्षण के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए हैं। ये वास्तविक समस्याएं हैं। इन पर चर्चा करने के बजाय भाजपा का हर सवाल को राजनीतिक साजिश बताना आदिवासी समाज की आवाज का अपमान है।

आलोक दूबे ने सवाल किया कि क्या अपने हॉस्टल में खाने और रहने की सुविधा मांगना बरगलाना है? क्या आरक्षण का हक मांगना बरगलाना है? भाजपा आदिवासियों की हर जायज मांग को बरगलाना कहकर टाल देती है।

हेमंत सरकार आदिवासी बच्चों और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्षरत – भाजपा सिर्फ आरोप लगा रही

झारखंड सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए आलोक दूबे ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार आदिवासी समाज, गरीबों, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा, “मंईयां सम्मान योजना के माध्यम से राज्य की 50 लाख महिलाओं को हर महीने आर्थिक सम्मान दिया जा रहा है। आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा प्रोत्साहन योजना, छात्रवृत्ति, साइकिल वितरण, आदिवासी छात्रावासों का जीर्णोद्धार, और विदेश में पढ़ने के लिए मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना लागू की गई है।”

आलोक दूबे ने कहा कि भाजपा सिर्फ आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस-झामुमो सरकार जमीन पर काम कर रही है। रोजगार के लिए स्थानीय नीति में 75% आरक्षण, 1932 खतियान आधारित नियोजन नीति, और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए सीएनटी-एसपीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

भाजपा बताए – शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य पर क्या किया?

आलोक दूबे ने भाजपा से सीधे सवाल पूछे, यदि आदिवासी समाज की समस्याओं को उठाना ‘बरगलाना’ है, तो भाजपा बताए कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, छात्रावास, विस्थापन और जल-जंगल-जमीन के सवालों पर उसने क्या ठोस काम किया है?

उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2014 से 2019 तक झारखंड में रघुवर दास के नेतृत्व में सरकार चलाई, उस दौरान आदिवासियों की जमीन छीनने के लिए सीएनटी-एसपीटी में संशोधन की कोशिश की गई थी, जिसका पूरे राज्य में विरोध हुआ था। उसी सरकार ने आदिवासियों पर लाठीचार्ज कराया था। केवल बयानबाजी और आरोप लगाने से आदिवासी समाज की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। भाजपा को बताना चाहिए कि उसने 5 साल में कितने आदिवासी छात्रों को छात्रावास दिया, कितने स्कूल खोले, कितनी नौकरियां दी?

जल-जंगल-जमीन से लेकर हर सवाल पर कांग्रेस आदिवासियों के साथ – आलोक दूबे

आलोक दूबे ने कहा कि आदिवासी समाज देश का मूल निवासी है और जल, जंगल, जमीन तथा प्राकृतिक संसाधनों पर अपने अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्षरत रहा है। उनके अधिकारों, सम्मान और संवैधानिक सुरक्षा की लड़ाई को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी। यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और मानवाधिकार का मुद्दा है।

उन्होंने कहा,आदिवासी भाई-बहनों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। जहां भी उनके साथ अन्याय होगा, कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी। भाजपा को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय पहले अपने काम का हिसाब आदिवासी समाज के सामने रखना चाहिए। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में जहां भाजपा की सरकार है, वहां आदिवासियों की हालत सबसे खराब क्यों है, इसका जवाब भाजपा दे।

आलोक दूबे ने अंत में कहा कि भाजपा के नए प्रभारी को झारखंड की संस्कृति, यहां की आदिवासी परंपरा और यहां के संघर्ष को समझना चाहिए। हवा-हवाई बयानबाजी से झारखंड में भाजपा का जनाधार नहीं बढ़ने वाला।

 

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