Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता अख्तर अली ने शाहबानो प्रकरण और तीन तलाक के मुद्दे पर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को राजनीतिक आरोपों तक सीमित करने के बजाय तथ्यों, कानूनों और न्यायपालिका के फैसलों के पूरे संदर्भ में समझना चाहिए।
अख्तर अली ने कहा कि वर्ष 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो मामले में तलाकशुदा मुस्लिम महिला के गुजारा भत्ते के अधिकार को मान्यता दी थी। इसके बाद 1986 में राजीव गांधी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए अलग कानून बनाया। इस कानून में उचित और न्यायसंगत आर्थिक प्रावधान, मेहर तथा संपत्ति से संबंधित अधिकार शामिल थे। हालांकि, इसके प्रभाव को लेकर देश में बहस हुई, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2001 में इसकी व्याख्या करते हुए महिला के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का रास्ता स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि 10 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम तलाकशुदा महिला दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता मांग सकती है। इससे स्पष्ट है कि इस विषय की कानूनी स्थिति को समझने के लिए पूरे न्यायिक इतिहास को देखना आवश्यक है।
तीन तलाक के मुद्दे पर अख्तर अली ने कहा कि यह कहना कि मोदी सरकार ने तलाक की प्रथा को ही समाप्त कर दिया, कानूनी स्थिति का अधूरा वर्णन है। वर्ष 2019 के कानून ने मुस्लिम पति द्वारा तत्काल और अपरिवर्तनीय तीन तलाक की घोषणा को शून्य एवं अवैध बनाया तथा इसके लिए दंडात्मक प्रावधान किए। इसका अर्थ यह नहीं है कि विवाह-विच्छेद की हर प्रक्रिया समाप्त हो गई। तलाक के अन्य तरीके और उनकी वैधता अलग कानूनी प्रश्न हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय में तलाक की विभिन्न प्रक्रियाओं को लेकर धार्मिक और कानूनी मतभेद रहे हैं। तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन जैसी प्रक्रियाओं में निर्धारित अंतराल और सुलह की गुंजाइश का महत्व है। इसलिए इन प्रक्रियाओं को एक बैठक में तत्काल तीन तलाक देने की प्रथा के समान बताना सही नहीं है।
अख्तर अली ने कहा कि बाबूलाल मरांडी जी को शाहबानो मामले, 1986 के कानून और तीन तलाक संबंधी कानूनों पर बयान देते समय तथ्यों की पूरी जानकारी रखनी चाहिए। महिला अधिकारों का प्रश्न किसी राजनीतिक दल के प्रचार तक सीमित नहीं होना चाहिए। असली कसौटी यह है कि हर महिला को सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और न्याय मिले तथा कानून का निष्पक्ष पालन हो।
