Ranchi : कांग्रेस की राजनीति देश की लोकतांत्रिक मर्यादाओं और आर्थिक हितों के विपरीत है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल बरनवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए चार प्रमुख सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा की कांग्रेस जन महाभियोग के नाम पर हुड़दंग क्यों करना चाहती है? दिल्ली में रैली कर देश को अस्थिर क्यों करना चाहती है? संसद की गरिमा को धूमिल क्यों करना चाहती है ?
कांग्रेस जनता से नकारे जाने पर वोट चोरी का आरोप लगाकर चुनाव आयोग को हटाना चाहती है : दीनदयाल बरनवाल
दीनदयाल बरनवाल ने कहा कि कांग्रेस दिवाली पूर्व दिल्ली में जनमहाभियोग के नाम पर रैली आयोजित कर राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बनाना चाहती है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं और संसद की गरिमा को निशाना बनाना उचित नहीं है। जब कांग्रेस को जनता का अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता, तब वह अपनी राजनीतिक विफलताओं की समीक्षा करने के बजाय वोट चोरी का आरोप लगाती है। अब चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस को जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए।
मोहब्बत की दुकान का नारा देकर क्या कांग्रेस 1984 के सिख विरोधी दंगों के कत्लेआम को न्यायसंगत बताना चाहती है? : दीनदयाल बरनवाल
बरनवाल ने कहा कि कांग्रेस के नेता मोहब्बत की दुकान खोलने का नारा देते हैं, लेकिन 1984 के सिख विरोधी दंगों का दर्दनाक इतिहास देश कभी नहीं भूल सकता। उन दंगों में हजारों निर्दोष लोगों की जान गई, परिवार उजड़ गए और मानवता शर्मसार हुई। पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए दशकों तक संघर्ष करना पड़ा। कांग्रेस को बताना चाहिए कि मोहब्बत की बातें करने वाली पार्टी उस भयावह इतिहास और अपनी राजनीतिक जवाबदेही पर स्पष्ट जवाब क्यों नहीं देती? केवल नारों से इतिहास के घाव नहीं भरते। कांग्रेस को पीड़ित परिवारों के दर्द और न्याय के सवालों पर गंभीरता दिखानी चाहिए।
देश पर इमरजेंसी थोपने वाली कांग्रेस बताए कि क्या यही मोहब्बत की दुकान है? : दीनदयाल बरनवाल
दीनदयाल बरनवाल ने कहा कि वर्ष 1975 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा देश पर आपातकाल थोपना भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय था। उस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित किया गया, विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया और प्रेस की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप लगाई गई। मीडिया की आवाज दबाई गई तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर चोट पहुंची। जिस कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित किया, वही आज मोहब्बत और लोकतंत्र की बातें करती है। कांग्रेस को देश की जनता को बताना चाहिए कि क्या यही उसकी मोहब्बत की दुकान की वास्तविकता है?
कांग्रेस दिवाली के समय दिल्ली में रैली निकालकर देश के आर्थिक विकास का पहिया रोकना चाहती है : दीनदयाल बरनवाल
बरनवाल ने कहा कि दिवाली देश के करोड़ों व्यापारियों, दुकानदारों, छोटे उद्यमियों और आम परिवारों के लिए आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण अवसर है। त्योहार के समय बाजारों में खरीदारी बढ़ती है, व्यापार को गति मिलती है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी होती है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर दिल्ली में बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करने से यातायात, व्यापारिक गतिविधियों और आम नागरिकों की दिनचर्या प्रभावित होने की आशंका है। कांग्रेस को समझना चाहिए कि राजनीतिक विरोध के अधिकार के साथ देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की सुविधाओं की जिम्मेदारी भी जुड़ी है। आखिर दिवाली के समय ही रैली आयोजित करने का औचित्य क्या है?
