Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश द्वारा संसद में उठाई गई तथाकथित ‘आदिवासी सांस्कृतिक कॉरिडोर’ की मांग को नगर निकाय चुनाव को प्रभावित करने वाला राजनीतिक प्रपंच बताया है।

 

आलोक कुमार दुबे ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा नेताओं को आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति और आस्था की अचानक याद आ जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अवसरवादी है। उन्होंने सवाल उठाया कि डबल इंजन की सरकार के पूरे कार्यकाल में यह प्रेम आखिर कहां चला गया था?

 

उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य—दोनों जगह भाजपा की सरकार थी, तब आदिवासियों की जमीन से जुड़े कानूनों को कमजोर करने, वनाधिकार कानून को निष्प्रभावी करने और जल-जंगल-जमीन पर कॉर्पोरेट हस्तक्षेप बढ़ाने के प्रयास किए गए। उस समय न तो रोहतासगढ़ की चिंता थी, न मुड़मा की और न ही मारंग बुरु की पवित्रता की।

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि आज जिन स्थलों को सांस्कृतिक धरोहर बताया जा रहा है, उन्हीं क्षेत्रों में भाजपा शासन के दौरान सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं पहुंचीं। अब नगर निकाय चुनाव से ठीक पहले भावनात्मक मुद्दों को उछालकर आदिवासी समाज को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।

 

आलोक कुमार दुबे ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी समाज किसी के चुनावी एजेंडे का मोहरा नहीं है। उनकी संस्कृति और आस्था की रक्षा नारेबाजी से नहीं, बल्कि ईमानदार नीति, संवैधानिक संरक्षण और जमीनी विकास से होती है, जिसे कांग्रेस पार्टी ने हमेशा प्राथमिकता दी है।

 

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता यह भली-भांति समझती है कि जो सरकारें सत्ता में रहते हुए आदिवासियों के अधिकार छीनती रहीं, वे आज उनकी पहचान की बातें करने का नैतिक अधिकार नहीं रखतीं।

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