Ranchi: झारखंड के बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने इस पूरे मामले में चल रही जांच प्रक्रिया और सरकार द्वारा दिए जा रहे आश्वासनों पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे जनता को गुमराह करने की कोशिश बताया है।

अजय साह ने कहा कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक सीआईडी जांच शुरू नहीं होना अपने आप में कई संदेह पैदा करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस एजेंसी को जांच सौंपी जानी है, उसकी निष्पक्षता पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। उनके अनुसार, यह घोटाला शुरुआत में करीब 3.5 करोड़ रुपये का था, जो धीरे-धीरे 14 जिलों में फैलते हुए आधिकारिक रूप से 350 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने आशंका जताई कि जिस तेजी से यह आंकड़ा बढ़ रहा है, वह भविष्य में हजारों करोड़ के घोटाले का रूप ले सकता है और यह स्थिति कहीं न कहीं चारा घोटाले के दूसरे संस्करण जैसी प्रतीत हो रही है।

भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस महाघोटाले की जांच झारखंड पुलिस के बजाय सीआईडी को इसलिए सौंपी जानी है ताकि एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जा सके। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इस उद्देश्य के विपरीत नजर आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में “अनुराग गुप्ता मॉडल” के तहत सीआईडी और झारखंड पुलिस की कमान एक ही अधिकारी के हाथों में केंद्रित कर दी गई है। वर्तमान में एडीजी सीआईडी मनोज कौशिक को एडीजी मुख्यालय और रांची के आईजी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

अजय साह ने यह भी बताया कि ट्रेजरी घोटाला मूल रूप से पुलिस ट्रेजरी से जुड़ा मामला है, जिसकी जवाबदेही डीडीओ यानी संबंधित जिलों के एसपी पर होती है। उन्होंने उल्लेख किया कि मनोज कौशिक वर्ष 2012 से 2014 के बीच हजारीबाग के एसपी (डीडीओ) रह चुके हैं। ऐसे में यदि वही अधिकारी इस मामले की जांच का नेतृत्व करते हैं, तो यह ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। साथ ही, जिन जिलों में यह घोटाला संदिग्ध है, वे वर्तमान में भी उनके अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जिससे निष्पक्ष जांच की संभावना और भी कम हो जाती है।

भाजपा ने मांग की है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए मनोज कौशिक को सीआईडी प्रमुख के पद से हटाकर किसी ऐसे अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए, जिसका इन जिलों या ट्रेजरी मामलों से पूर्व में कोई प्रत्यक्ष संबंध न रहा हो। अंत में अजय साह ने दोहराया कि यदि राज्य सरकार वास्तव में इस मामले को लेकर गंभीर है, तो उसे तुरंत न्यायिक जांच के आदेश देने चाहिए या फिर इस पूरे प्रकरण को सीबीआई को सौंप देना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।

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