New Delhi/Ranchi: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग JSSC की 2015 की सिपाही भर्ती से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर आई है। जिला पुलिस और झारखंड सशस्त्र पुलिस JAP की भर्ती में लिखित, शारीरिक और मेडिकल परीक्षा पास करने के बाद भी कट-ऑफ के फेर में बाहर हो गए 888 अभ्यर्थियों के लिए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को अहम अंतरिम निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड वत्सल्य विग्या और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद शोएब आलम के माध्यम से दायर विशेष अनुमति याचिका SLP पर 3 जून 2026 को सुनवाई हुई। कोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष को सुनने के बाद राज्य सरकार को 13 जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अब 15 जुलाई 2026 को होगी।

10 साल की कानूनी लड़ाई को मिली पहचान

एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड वत्सल्य विग्या ने कहा, “यह उन अभ्यर्थियों के न्याय की जीत है जो पिछले एक दशक से संघर्ष कर रहे हैं। विज्ञापन संख्या 04/2015 के तहत कुल 7,272 पद निकले थे। इनमें से 2,380 पद खाली रह गए क्योंकि महिला और होमगार्ड श्रेणी के पर्याप्त उम्मीदवार नहीं मिले। हमने कोर्ट के सामने पूरी रणनीति के साथ रखा कि जो अभ्यर्थी लिखित, शारीरिक और मेडिकल परीक्षा पास कर चुके हैं, उन्हें इन खाली सीटों पर समायोजित किया जाए। कोर्ट ने हमारी दलीलों को स्वीकार करते हुए फिलहाल 888 योग्य अभ्यर्थियों के दावों पर विचार का निर्देश दिया है।”

कोर्ट ने उम्र और मेडिकल में दी छूट

सुप्रीम कोर्ट ने अभ्यर्थियों की लंबी कानूनी लड़ाई को देखते हुए मानवीय आधार पर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अभ्यर्थियों को केस लड़ते-लड़ते लगभग 10 साल बीत चुके हैं। इसलिए उनके जीवनयापन के अधिकार को ध्यान में रखते हुए अधिकतम आयु सीमा में ढील दी जाए। इसके साथ ही इन 888 उम्मीदवारों के लिए नया मेडिकल टेस्ट आयोजित करने का आदेश दिया गया है। लेकिन उम्र के प्रभाव को देखते हुए मेडिकल मानकों में उचित बदलाव किया जाएगा। यानी उम्र बढ़ने के कारण फिजिकल पैरामीटर में रियायत मिलेगी।

वरिष्ठता और नियुक्ति की शर्तें साफ

कोर्ट ने नियुक्ति की शर्तें भी स्पष्ट कर दी हैं। नए टेस्ट में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा। लेकिन उन्हें मौजूदा सिपाही वरिष्ठता सूची में सबसे अंत में रखा जाएगा। आपसी वरिष्ठता 2015 की मूल मेरिट सूची के आधार पर तय होगी। इससे पहले से नियुक्त सिपाहियों की वरिष्ठता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार को 13 जुलाई 2026 तक बताना है कि उसने कोर्ट के आदेश पर क्या कार्रवाई की है। अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

क्या था 2015 का पूरा मामला

JSSC ने साल 2015 में जिला पुलिस और JAP में सिपाही के 7,272 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन संख्या 04/2015 जारी किया था। हजारों अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। लिखित, दौड़ और मेडिकल पास करने के बाद भी कई अभ्यर्थी अंतिम मेरिट में मामूली अंकों से पीछे रह गए। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आया कि 1,168 महिला पद और 1,212 सामान्य पद समेत कुल 2,380 पद रिक्त रह गए। कारण था आरक्षित श्रेणियों में पर्याप्त योग्य उम्मीदवार न मिलना। तभी से अभ्यर्थी मांग कर रहे थे कि पास हो चुके उम्मीदवारों को इन रिक्त सीटों पर समायोजित किया जाए। हाईकोर्ट के सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच से याचिका खारिज होने के बाद अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 27 मई 2026 तक कोर्ट के समक्ष कुल 888 अभ्यर्थी अपना दावा लेकर आए हैं।

अभ्यर्थियों के लिए संबल बना आदेश

झारखंड हाईकोर्ट से निराशा मिलने के बाद टूट चुके सैकड़ों युवाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह रुख उम्मीद बनकर आया है। 10 साल से नौकरी की आस में बैठे इन अभ्यर्थियों की उम्र निकल चुकी है। उम्र सीमा में छूट और मेडिकल में मॉड्यूलेशन से अब उनके सिपाही बनने का सपना फिर से साकार हो सकता है।

त्वरित तथ्य

विवरण | संख्या/तारीख
विज्ञापन संख्या | 04/2015 (JSSC)
कुल विज्ञापित पद | 7,272
कुल रिक्त रह गए पद | 2,380 – महिला 1,168, सामान्य 1,212
कोर्ट के समक्ष कुल आवेदक | 888 (27.05.2026 तक)
सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिनांक | 03 जून 2026
अनुपालन रिपोर्ट की अंतिम तिथि | 13 जुलाई 2026
अगली सुनवाई | 15 जुलाई 2026

हम आपको बता दें की, यह सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश है। अंतिम निर्णय 15 जुलाई की सुनवाई के बाद ही होगा। राज्य सरकार को कोर्ट के निर्देशों पर रिपोर्ट देनी है।

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