Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सह मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान को पूरी तरह से भ्रामक, हकीकत से परे और आदिवासियों की आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का आदिवासियों के आस्था स्थल पर जाना केवल एक चुनावी स्टंट और इवेंट मैनेजमेंट का हिस्सा है, जबकि धरातल पर भाजपा की नीतियां हमेशा से आदिवासी विरोधी रही हैं।

लाल किशोर नाथ शाहदेव ने सीधे सवाल किया कि अगर मोदी सरकार आदिवासियों की पहचान और उनकी परंपराओं के प्रति इतनी ही गंभीर है, तो झारखंड विधानसभा से पारित कर भेजे गए सरना आदिवासी धर्म कोड को केंद्र सरकार अब तक दबाकर क्यों बैठी है? आदिवासियों को अपनी अलग धार्मिक पहचान चाहिए, लेकिन भाजपा उन्हें केवल वोट बैंक समझकर उनका धार्मिक अस्तित्व मिटाना चाहती है।

कांग्रेस महासचिव लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि एक तरफ भाजपा आदिवासियों के विकास का ढोंग रच रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र की मोदी सरकार ने वन संरक्षण कानून में संशोधन कर आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों से बेदखल करने की पूरी पटकथा लिख दी है। कॉरपोरेट मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासियों की जमीनों को कौड़ियों के भाव पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिए जाने के भाजपा के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि शिबू सोरेन झारखंड के करोड़ों आदिवासियों-मूलवासियों के दिल में बसते हैं। वे खुद एक आंदोलन हैं। भाजपा को यह याद रखना चाहिए कि इसी भाजपा ने और इसकी केंद्रीय एजेंसियों ने दिशोम गुरु और उनके परिवार को राजनीतिक रूप से प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज जब वे जन-जन के नेता हैं, तो भाजपा इसका राजनीतिक श्रेय लेने की नाकाम कोशिश कर रही है।

लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का नाम लेकर भाजपा अपनी पीठ थपथपाना बंद करे। पूरा देश गवाह है कि जब संसद के नए भवन का उद्घाटन हुआ, तो देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति को किनारे कर दिया गया। वहीं, झारखंड में एक लोकप्रिय आदिवासी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को साजिश के तहत जेल भेजने का पाप भी भाजपा ने ही किया है।

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