New Delhi/Ranchi: सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के पिपरवार क्षेत्र में स्थापित कोल नीर प्लांट का आज केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री  जी .किशन रेड्डी द्वारा दिल्ली से वर्चुअल उद्घाटन किया गया। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार)  जितेंद्र सिंह ,कोयला खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे,सचिव, कोयला मंत्रालय विक्रम देव दत्त एवं अपर सचिव रूपिंदर बरार की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

दिल्ली में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन  बी साई राम, सीसीएल सीएमडी  निलेंदु कुमार सिंह समेत कोल इंडिया लिमिटेड के अन्य अनुषंगी कंपनियों के सीएमडी एवं वरीय पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री  जी. किशन रेड्डी ने कहा कि ‘कोल नीर’ नवाचार, वेस्ट टू वेल्थ की तथा एवं प्रधानमंत्री जी की अवधारणा ‘हर घर जल’ के संकल्प का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि खदानों के जल का प्रभावी उपयोग कर उसे जनकल्याण ,विकास का माध्यम एवं आजीविका का साधन बनाया जा रहा है। साथ ही, खदान बंदी (Mine Closure) की प्रक्रिया के लिए एक समग्र इकोसिस्टम विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से की जाने वाली माइन क्लोजर गतिविधियां पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदाय की सहभागिता को मजबूत करती हैं। इसके तहत पुनर्वासित (Reclaimed) खनन क्षेत्रों का उपयोग इको पार्क सहित विभिन्न सामुदायिक एवं पर्यावरण हितैषी परियोजनाओं के विकास में किया जा रहा है।

 

वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है, तो हमें उनसे एक कदम आगे बढ़कर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि विकास और कार्य संस्कृति में नवाचार के साथ-साथ संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। हमें अपने प्राकृतिक एवं उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण और सतत उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि विकास की गति बनाए रखते हुए बर्बादी को रोका जा सके।

 

कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि “कोल नीर” पहल के माध्यम से आमजनमानस तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहल अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम भी बन रही है।

 

कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि ‘कोल नीर’ पहल के माध्यम से कोयला मंत्रालय माइन वॉटर के सतत एवं प्रभावी उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल स्थानीय समुदायों के लिए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करने के साथ-साथ जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और पर्यावरणीय संतुलन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

इस दौरान माननीय केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री, भारत सरकार द्वारा ‘आरोह’ (AAROH-The Rising) माइन क्लोजर पर वार्षिक रिपोर्ट का लोकार्पण किया गया।इसके अतिरिक्त सीसीएल द्वारा माइन क्लोजर से संबंधित मॉडल भी प्रदर्शित किया गया जिसका उद्घाटन माननीय मन्त्री द्वारा किया गया ।

 

वहीं, पिपरवार क्षेत्र के उद्घाटन समारोह में निदेशक(वित्त)  पवन कुमार मिश्रा, निदेशक(मानव संसाधन)  हर्ष नाथ मिश्र, निदेशक (तकनीकी/संचालन)  चंद्र शेखर तिवारी, निदेशक( योजना एवं परियोजना)  अनूप हंजूरा, महाप्रबंधक पिपरवार  सुजीत कुमार, विभिन्न क्षेत्र के महाप्रबंधगण एवं सीसीएल के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा विभिन्न श्रमिक संघ के प्रतिनिधिगण, स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

 

गौरतलब है कि इस अत्याधुनिक प्लांट की जल शोधन क्षमता 25 किलोलीटर प्रतिदिन है। यहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से 500 मिलीलीटर और 1 लीटर की बोतलों को प्रति मिनट 40 बोतल तक भरने की क्षमता विकसित की गई है। इसके साथ ही 20 लीटर के जार भरने की सुविधा भी उपलब्ध है।

 

सीसीएल के पिपरवार क्षेत्र में बना यह प्लांट पूर्णतः महिला द्वारा संचालित होगा, इसके लिए सीसीएल की ओर से स्वयं सहायता ग्रुप की महिला सदस्यों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। यह प्लांट न सिर्फ स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि आस पास के क्षेत्रों में स्वच्छ एवं शुद्ध पेयजल की भी उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

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