Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने चीन के साथ भारत के सीमा विवाद, सेना के आधुनिकीकरण और केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनावी भाषणों में 56 इंच का सीना दिखाने और चीन को लाल आंखें दिखाने का दावा करने वाली भाजपा आज चीन के सवाल पर स्पष्ट जवाब देने से क्यों बच रही है? देश की जनता जानना चाहती है कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा का सवाल आता है, तब प्रधानमंत्री के वे बड़े-बड़े दावे कहां चले जाते हैं?
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं और सीमा पर उसकी गतिविधियों को लेकर देश को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। यदि भारत-चीन सीमा पर तनाव और चीनी सैनिकों के साथ झड़पों की खबरें सामने आ रही हैं, तो केंद्र सरकार को तथ्यों के साथ देश को विश्वास में लेना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर पारदर्शिता, जवाबदेही और मजबूत नेतृत्व आवश्यक है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह देश को बताए कि सीमाओं की वर्तमान स्थिति क्या है और भारतीय सैनिकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सेना के आधुनिकीकरण का मुद्दा उठाते हुए आलोक कुमार दूबे ने कहा कि आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए अत्याधुनिक हथियारों, निगरानी प्रणालियों, संचार तकनीक, सीमा पर बुनियादी ढांचे और सैनिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है। चीन की सैन्य तैयारियों के मुकाबले भारत को अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा। केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले वर्षों में सेना के आधुनिकीकरण के लिए क्या लक्ष्य निर्धारित किए गए, कितनी प्रगति हुई और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाई जा रही है।
अग्निवीर योजना पर सवाल उठाते हुए आलोक कुमार दूबे ने कहा कि सेना में भर्ती की व्यवस्था और सैनिकों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले जवानों को सम्मान, स्थिरता और बेहतर भविष्य का भरोसा मिलना चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि सैन्य भर्ती व्यवस्था में किए गए बदलावों से सेना की परिचालन क्षमता, जवानों के मनोबल और अनुभवी सैनिकों की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। सैनिकों का मनोबल केवल नारों से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों, बेहतर सुविधाओं और उनके भविष्य की सुरक्षा से मजबूत होता है।
आलोक कुमार दूबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश जानना चाहता है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई मुलाकातों और उच्चस्तरीय वार्ताओं के बावजूद सीमा विवाद का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पाया। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक बातचीत और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में मुलाकातें अपनी जगह हैं, लेकिन भारत की संप्रभुता, सीमाओं की सुरक्षा और सैनिकों के सम्मान से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री को देश के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि चीन के साथ बातचीत में भारत ने सीमा सुरक्षा, वास्तविक नियंत्रण रेखा और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर क्या ठोस परिणाम हासिल किए हैं।
उन्होंने कहा कि लद्दाख में पेट्रोलिंग पॉइंट और सीमा पर भारतीय सैनिकों की पहुंच को लेकर उठे सवालों पर भी सरकार को तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में भारतीय सैनिकों की गश्त या पहुंच प्रभावित हुई है, तो सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाना देशहित के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। विपक्ष और देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है और सरकार भारतीय हितों की रक्षा के लिए कौन-से प्रभावी कदम उठा रही है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब नारों और चुनावी दावों से आगे बढ़कर देश को ठोस जवाब देना चाहिए। देश जानना चाहता है कि चीन के सामने 56 इंच का सीना दिखाने और लाल आंखें दिखाने का दावा आखिर कहां गया? भारत के बहादुर सैनिक कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। उनके साहस, बलिदान और समर्पण का सम्मान तभी होगा, जब सरकार उनकी सुरक्षा, सेना के आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं, जवाबदेही चाहिए। चीन के सामने दिखावे की नहीं, दृढ़ इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व की जरूरत है। देश की सीमाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर देश की जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।
