Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा,भाजपा नेताओं की ओर से बजट 2026 और जी राम जी योजना को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की जमीनी वास्तविकता ठीक इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाली मनरेगा आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए घोषित बजट के आंकड़ों के बाद अब मनरेगा बचाओ संग्राम पार्टी तेज करेगी, क्योंकि आंकड़ों का गणित सरकार के दावों और धरातल की हकीकत के बीच एक बड़ी खाई को उजागर कर रहा है।

लाल किशोर नाथ शाहदेव ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मनरेगा का बजट 88,000 करोड़ था। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने इसे बढ़ाकर जी राम जी योजना के तहत 95,692 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा है। पहली नजर में यह वृद्धि सकारात्मक दिखती है, लेकिन हकीकत कुछ अलग है। क्योंकि यदि 100 दिनों के रोजगार की गारंटी के लिए 88,000 करोड़ की आवश्यकता थी, तो मांग के अनुरूप इसे 125 दिन करने के लिए कम से कम 1,10,000 करोड़ के बजट की आवश्यकता होनी चाहिए। इस हिसाब से वर्तमान आवंटित बजट अभी से ही 14,308 करोड़ कम है।

कांग्रेस प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने जी राम जी योजना की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बजट ही पर्याप्त नहीं होगा, तो समय पर मजदूरी का भुगतान और नए कार्यों की स्वीकृति कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी और पलायन को रोकने के लिए मनरेगा एक सुरक्षा चक्र है, लेकिन बजटीय प्रावधानों की कमी इसे कमजोर कर रही है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत यह मांग उठ रही है कि सरकार आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय धरातल की जरूरतों को समझे। यदि सरकार वास्तव में ग्रामीण विकास के प्रति गंभीर है, तो उसे कार्य दिवसों की संख्या के अनुपात में बजट आवंटित करना चाहिए, अन्यथा यह योजना केवल कागजों तक सिमट कर रह जाएगी।

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