रांची : झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ नेता सुर्यंकांत शुक्ला ने 16वें वित्त आयोग को राज्य की हिस्सेदारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 16वें वित्त आयोग की अनुशंसा 90% राज्यों ने आयोग को सौंपे गये मांग पत्र में मौजूदा 41% vertical devolution को बढ़ाकर 50% हिस्सेदारी की मांग रखी थी. लेकिन क्या आया अनुशंसा में ? वहीं 41% यथावत ।

राज्यों को उम्मीद थी कि GST रिजीम के बाद राज्यों की जो रेवेन्यू ओटोनामी घटी है उसकी भरपाई (कुछ हद तक तो) 16वां FC जरुर करेगा। संविधान के अनुसार वित्त आयोग का काम सिर्फ नंबर crunching नही है बल्कि राज्यों की वास्तविक राजकोषीय क्षमता क्षेत्रीय असमानता संरचनात्मक बाधाएं यथा जनसंख्या, गरीबी, आपदा जोखिम और केन्द्र सरकार की नीतियों से राज्यों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ ( मनरेगा के बदले लायी गयी स्कीम से 40% का वित्तीय बोझ ) पर समग्रता से अध्ययन कर एक वाजिब अनुशंसा करना है।

कल के बजट में राज्यों को यह आशा थी की 50% नही भी तो कुछ ना कुछ तो बढ़ोतरी की अनुशंसा ज़रूर ही किया गया होगा 16 वित्त आयोग द्वारा। लेकिन राज्यों को सिर्फ निराशा हाथ लगी। खासकर कल का बजट झारखंड को निराश करने वाला था।

सवाल खड़ा होता है कि 16वें वित आयोग का राज्यों का इतना व्यापक दौरा क्या सच में कंसल्टेटिव अभ्यास रहा या सिर्फ प्रक्रियात्मक बाॅस टिक था।

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