Ranchi: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, कि आज राज्य की पूरी स्वास्थ्य प्रणाली वेंटिलेटर पर चली गई है। एक तरफ 14 जिलों में थैलेसीमिया से पीड़ित सैकड़ों बच्चे खून के इंतजार में तड़प रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार सिर्फ दिखावे की राजनीति में व्यस्त है।उन्होंने कहा कि झारखंड में डॉक्टरों की भारी कमी है। स्वीकृत पदों के मुकाबले हजारों पद खाली पड़े हैं। 60% विशेषज्ञ डॉक्टर के पद रिक्त हैं। बड़े सरकारी अस्पताल में 70% से 80% तक नर्सों की कमी है। 3000 के आसपास पारा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई है। कई जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता न के बराबर है। कई हेल्थ सेंटर में पैरासिटामोल जैसी गोलियां भी नहीं है।

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि थैलेसीमिया पीड़ित मासूम बच्चों को सुरक्षित रक्त तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे भी गंभीर बात यह है कि राज्य में लापरवाही की हद तब पार हो गई जब बच्चों को जांच के बिना एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। दोषी डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों को नौकरी से बर्खास्त तक नहीं किया गया। यह केवल एक गलती नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता और लापरवाही का जीवंत उदाहरण है।प्रतुल ने आगे कहा कि राज्य का ब्लड बैंक सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है। खून की भारी कमी के कारण मरीजों को दर-दर भटकना पड़ रहा है, लेकिन सरकार इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही है।

प्रतुल शाहदेव ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि, जब पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था आईसीयू में है, तब मंत्री जी रिक्शा चलाकर फोटो खिंचवाने में व्यस्त हैं। जनता जानना चाहती है कि क्या स्वास्थ्य मंत्री अब रिक्शा से ही सरकारी अस्पतालों में ब्लड भी पहुंचाएंगे? उन्होंने मांग की, कि सरकार तुरंत राज्य में डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों की बहाली करे, ब्लड बैंक व्यवस्था को दुरुस्त करे और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए विशेष आपात योजना लागू करे।

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