Ranchi:भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झारखंड में वीबी जी राम जी योजना (मनरेगा योजना) में आए दिन सामने आ रहे फर्जीवाड़ा और मची व्यापक लूट को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। कहा कि झारखंड में मनरेगा मतलब लूट और भ्रष्टाचार।

अध्यक्ष ने कोडरमा के मरकच्चो के पूरनानगर पंचायत में हुए फर्जीवाड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां फर्जी मास्टर रोल और एमबी की आड़ में सरकारी राशि की जमकर लूट होने का मामला सामने आया है। दिलचस्प बात है कि मनरेगाकर्मियों की हड़ताल के बावजूद योजना के तहत काम जारी रहता है और भुगतान भी किया जाता है। स्पष्ट है कि अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल खेला जा रहा है।

वहीं उन्होंने कहा कि यह तो एक मामला है, पूरे राज्य में इस योजना में भारी लूट खसोट मचा हुआ है। इसके पूर्व भी चतरा के सिमरिया और प्रतापपुर में इसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आ चुकी है। हेमन्त सरकार में इस योजना से जुड़े कई अनूठे कारनामे सामने आ चुके हैं। मनरेगा के नाम पर गरीबों के पैसों पर डाका डाला जा रहा है। जामताड़ा की पूर्व उपायुक्त को मनरेगा मजदूर बना दिया जाता है। कभी जेल में बंद आदमी मजदूरी करता है, कभी मरा हुआ आदमी। साहेबगंज जिले के तालझरी प्रखंड में 2021 में ही मर चुका व्यक्ति 2022 में मजदूरी करता है और उसको मजदूरी का भुगतान भी कर दिया जाता है। यहां सिंचाई कूप की खुलेआम बोली लग रही है। मनरेगा में इस प्रकार के फर्जीवाड़े के कई मामले पूर्व में भी सामने आते रहे हैं। झारखंड लूट खसोट का अड्डा बन चुका है। कांग्रेसी जिस योजना को अपनी उपलब्धि बतलाते नहीं थकते, उन्हीं की सरकार में इस योजना का हाल बेहाल है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस योजना में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा इसका नाम जी राम जी योजना किए जाने पर हेमंत सरकार को आपत्ति है। झारखंड सरकार द्वारा विधानसभा में इस संबंध में प्रस्ताव तक पारित किया जाता है। जबकि 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए यह सब किया जा रहा है। निश्चित रूप से विकसित भारत जी राम जी योजना एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

आदित्य साहू ने झारखंड में इस योजना के बुरे हश्र के लिए राज्य सरकार की ढुलमुल नीति को जिम्मेवार ठहराया है। राज्य सरकार केवल कार्रवाई का दिखावा करती है। भ्रष्टाचार इस सरकार की मूल पहचान बन चुकी है। सरकार के स्तर पर ठोस कार्रवाई होती तो भ्रष्टाचारियों में मन में भय कायम होता परंतु सरकार कभी ऐसा चाहती ही नहीं। हेमंत सरकार को इस योजना के नामकरण का विरोध करने की बजाय भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। लेकिन हेमंत सोरेन सरकार में किसी प्रकार की सुधार की गुंजाइश की कल्पना भी बेमानी है।

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