Ranchi:प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब देशभर के छात्र और युवा प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री से भी जवाब मांग रहे हैं। भाजपा अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए झारखंड में छात्रों के आंदोलन का राजनीतिकरण कर रही है। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि यदि जेपीएससी की बात हो रही है, तो झारखंड के इतिहास का सबसे बड़ा काला अध्याय भाजपा शासनकाल में लिखा गया। भाजपा शासन के दौरान जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप प्रसाद, जो विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे थे, भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार हुए। इसके अलावा जेपीएससी के सदस्य फटिक चंद हेमरोम, शांति देवी और गोपाल नारायण सिंह* सहित कई लोग भ्रष्टाचार के मामलों में जेल गए। भाजपा बताए कि उस भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी किसकी थी?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी जांच से नहीं डरती। केवल पिछले छह वर्षों की नहीं, बल्कि राज्य गठन के बाद प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम सहित भाजपा शासनकाल में हुई सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराई जाए। साथ ही पहले से सीबीआई जांच के दायरे में आए मामलों की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए।

आलोक कुमार दूबे ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के कार्यकाल में जेपीएससी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे। यदि उस दौर की नियुक्तियों और परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई बड़े नाम कानून के शिकंजे में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड की महागठबंधन सरकार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेपीएससी आंदोलनकारी छात्रों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। सरकार ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल बयानबाजी नहीं की, बल्कि ठोस कार्रवाई भी शुरू की है। संभवतः झारखंड बनने के बाद यह पहला अवसर है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों पर जांच, कार्रवाई और गिरफ्तारी तक की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। यही सुशासन और जवाबदेही का अंतर है।

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार की सच्चाई देश के सामने आ चुकी है। भाजपा अब अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए झारखंड के छात्रों और युवाओं को गुमराह करने का प्रयास कर रही है, लेकिन छात्र-युवा अब सच्चाई को समझ चुके हैं और भ्रमित होने वाले नहीं हैं। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि भाजपा शासनकाल में जेपीएससी के अध्यक्ष और कई सदस्य जेल क्यों गए? पहले से सीबीआई जांच के दायरे में आए मामलों का क्या हुआ? यदि भाजपा वास्तव में छात्रों के हितैषी है, तो वह अपने शासनकाल की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन क्यों नहीं करती?

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कांग्रेस की मांग स्पष्ट है—भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता हो, दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण न मिले।

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