Ranchi: निर्दलीय राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र में कथित त्रुटियों को लेकर आपत्ति पर बहस में भाग लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद बुधवार को विशेष विमान से रांची पहुंचे। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा दोपहर 1 बजे तक बहस के लिए समय निर्धारित किए जाने के बावजूद समय से पहले ही कक्ष का दरवाजा बंद कर दिया गया, जिसके कारण वे अपनी बात नहीं रख सके।

 

झारखंड विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि उन्हें इस बात का खेद है कि वे बहस में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने कहा, “निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा 1 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था। मैं लगभग 12:30 बजे विधानसभा पहुंच गया था, लेकिन उससे पहले ही दरवाजा बंद कर दिया गया था। इसलिए मुझे अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल सका।”

 

उन्होंने कहा कि मामले की कानूनी बारीकियों पर उनके सहयोगी अधिवक्ता सुरेंद्र पाल सिंह विस्तार से जानकारी देंगे, जो शुरू से इस पूरे मामले को देख रहे हैं।

 

इस दौरान अधिवक्ता सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए कुल तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। गठबंधन के दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को स्वीकार कर लिया गया, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र में कई त्रुटियां और विसंगतियां थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि नाथवानी द्वारा दाखिल शपथ पत्र (एफिडेविट) में सभी आवश्यक और सही जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गई थीं, जिसके कारण प्रारंभिक स्तर पर उनके नामांकन पर सवाल उठे थे।

 

सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से नामांकन में पाई गई कमियों और तथ्यों को निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष रखा गया था। इसके बावजूद बाद में परिमल नाथवानी के नामांकन को स्वीकार कर लिया गया, जो निर्वाचन प्रक्रिया और स्थापित नियमों की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि नामांकन से संबंधित कई गंभीर बिंदुओं पर पार्टी की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई है और पूरे मामले की कानूनी समीक्षा की जा रही है।

 

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में सभी उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और यदि किसी उम्मीदवार को नियमों से परे जाकर राहत दी जाती है तो इससे चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। पार्टी ने मामले में निर्वाचन आयोग से पारदर्शी एवं निष्पक्ष निर्णय की मांग की है।

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