Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने टेलीग्राम पर लगाए गए प्रतिबंध को केंद्र सरकार की विफल नीतियों का परिणाम बताते हुए कहा है कि पेपर लीक रोकने में असफल मोदी सरकार अब छात्रों और आम नागरिकों को ही दोषी ठहराने का प्रयास कर रही है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि टेलीग्राम के CEO द्वारा यह सवाल उठाया जाना कि “15 करोड़ भारतीय उपभोक्ताओं को सज़ा क्यों दी जा रही है, जबकि पेपर लीक अन्य प्लेटफॉर्म से भी हो सकता है”, केंद्र सरकार की सोच और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। जब स्वयं संबंधित प्लेटफॉर्म के प्रमुख इस निर्णय की तार्किकता पर सवाल उठा रहे हैं, तब सरकार को देश के युवाओं और छात्रों के सामने जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि करोड़ों छात्र टेलीग्राम का उपयोग पढ़ाई, नोट्स, टेस्ट सीरीज, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और शैक्षणिक चर्चा के लिए करते हैं। पेपर लीक माफियाओं पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय पूरे प्लेटफॉर्म को निशाना बनाना ऐसा है जैसे अपराधी को छोड़कर आम लोगों को सज़ा देना।
आलोक दूबे ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं और भर्ती प्रक्रियाएं लगातार पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित हुई हैं, लेकिन सरकार आज तक उन नेटवर्कों और माफियाओं पर निर्णायक कार्रवाई नहीं कर पाई है जो युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म और छात्रों पर कार्रवाई का दिखावा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर अत्यधिक सख्ती, छात्रों की तलाशी, संचार माध्यमों पर प्रतिबंध और दिखावटी कदमों से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को पेपर लीक के असली सरगनाओं, उनके राजनीतिक संरक्षण और भ्रष्ट तंत्र पर प्रहार करना चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मांग की, कि वे देश के युवाओं को बताएं कि बार-बार हो रहे पेपर लीक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है। यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो उसे प्रतिबंध और प्रचार की राजनीति छोड़कर परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश का युवा सब कुछ देख रहा है। पेपर लीक माफियाओं पर कार्रवाई के बजाय छात्रों को परेशान करने की नीति लंबे समय तक नहीं चल सकती। सरकार को युवाओं की आवाज सुननी होगी और उनके भविष्य की रक्षा के लिए वास्तविक कार्रवाई करनी होगी।
