Ranchi: प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने छात्र आंदोलन को लेकर भाजपा पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि, भाजपा के पास न छात्रों के भविष्य का रोडमैप है, न रोजगार का समाधान और न ही युवाओं की समस्याओं का कोई ठोस जवाब। इसलिए अब भाजपा छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीतिक लड़ाई लड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दिशा विहीन, नीति विहीन और मुद्दा विहीन भाजपा राहुल गांधी की नकल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन नकल के लिए भी अक्ल चाहिए।

आलोक दूबे ने कहा कि झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने छात्रों के आंदोलन को पूरी संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक भावना के साथ संभाला। सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने संयम बरता। छात्रों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया और सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए अधिकांश मांगों पर सकारात्मक पहल की है। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों को दुश्मन नहीं, अपने परिवार का हिस्सा समझा है। यही कारण है कि आंदोलन के दौरान सरकार ने दमन का रास्ता नहीं चुना बल्कि संवाद और समाधान का रास्ता अपनाया। जेपीएससी से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई है, जांच आगे बढ़ी है और जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की गई है।

आलोक दूबे ने भाजपा को आईना दिखाते हुए कहा कि जो भाजपा आज छात्रों के आंदोलन में राजनीति तलाश रही है, उसे पहले अपने शासन वाले राज्यों में युवाओं के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंसुओं और बेरोजगारी के दर्द को राजनीतिक अवसर में बदलना भाजपा की पुरानी आदत रही है। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लोग भी आंदोलन में घुसकर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनका छात्र हित से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है। आंदोलनकारी छात्रों ने स्वयं स्वीकार किया है कि विधानसभा घेराव के दौरान कुछ उपद्रवी तत्व आंदोलन में शामिल हो गए थे। ऐसे लोगों से छात्रों को सावधान रहने की जरूरत है।

छात्र साथियों, अब घर लौटिए, आपकी लड़ाई को सरकार ने सुना है:आलोक कुमार दूबे

आलोक कुमार दूबे ने छात्रों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि “मेरे प्यारे छात्र साथियों, आपने अपनी ताकत और एकजुटता से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई है। आपकी बात सुनी गई है, आपकी मांगों पर कार्रवाई शुरू हुई है। अब किसी के बहकावे में आकर अपने आंदोलन को किसी राजनीतिक दल का हथियार मत बनने दीजिए।”  उन्होंने कहा कि आंदोलन करना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आंदोलन की सफलता तभी है जब वह अपने उद्देश्य को हासिल करे। जब सरकार आपकी अधिकांश मांगों पर सकारात्मक रुख अपना चुकी है, तो अब आंदोलन को समाप्त कर संवाद और समाधान के रास्ते को मजबूत करना चाहिए।

उन्होंने छात्रों से कहा, “आपका भविष्य किसी राजनीतिक दल के हाथ का खिलौना नहीं है। आपकी किताबें, आपकी परीक्षा, आपकी नौकरी और आपका भविष्य ही आपकी असली लड़ाई है। किसी ऐसे व्यक्ति को अपने आंदोलन की कमान मत सौंपिए, जिसे आपके भविष्य से ज्यादा राहुल गांधी और हेमंत सोरेन की राजनीति की चिंता है।”

आलोक दूबे ने कहा कि झारखंड की धरती संघर्ष, संस्कार और लोकतांत्रिक मूल्यों की धरती है। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा, “सरकार ने आपकी आवाज सुनी है, अब आप भी सरकार पर विश्वास कीजिए। अपने घर लौटिए, अपनी पढ़ाई और अपने भविष्य की ओर लौटिए। आपकी जीत किसी सड़क या बैरिकेड को तोड़ने में नहीं, बल्कि अपने सपनों को पूरा करने में है।”

आलोक दूबे ने कहा कि भाजपा को छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक तमाशा बनाने का अवसर नहीं मिलेगा। छात्र जागरूक हैं, समझदार हैं और अपने भविष्य का फैसला खुद करने में सक्षम हैं।

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