Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अलोक कुमार दूबे ने जल जीवन मिशन को लेकर भाजपा द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह पूरी कवायद केंद्र सरकार की नाकामी और भ्रमित करने वाली नीति को छिपाने की एक सियासी चाल है। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले यह स्पष्ट करे कि जिस योजना पर वह आज राज्य सरकार को घेर रही है, वह कोई नई या क्रांतिकारी योजना नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की योजना का नाम बदलकर पेश किया गया संस्करण है।

 

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि जल जीवन मिशन को लेकर भाजपा जनता के सामने भ्रम फैला रही है। यह योजना आज भी झारखंड सहित कई राज्यों में पूर्ण रूप से लागू ही नहीं हुई है। जिन राज्यों में इसे लागू बताया जा रहा है, वहां भी अधिकांश जगहों पर न तो केंद्र की ओर से समय पर फंड उपलब्ध कराया गया और न ही तकनीकी व प्रशासनिक सहयोग दिया गया। ऐसे में राज्य सरकार पर एकतरफा आरोप लगाना पूरी तरह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।

 

उन्होंने कहा कि भाजपा यह बताने से बच रही है कि केंद्र सरकार ने पहले ‘राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम’ जैसी योजनाओं को बंद कर केवल नाम बदलकर नई पैकेजिंग में पेश किया। नरेंद्र मोदी सरकार की यह पुरानी रणनीति रही है कि योजनाओं के नाम बदलकर प्रचार किया जाए, लेकिन जमीनी स्तर पर संसाधन और संरचना उपलब्ध न कराई जाए।

 

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में पेयजल परियोजनाओं को लागू करना आसान नहीं है। इसके बावजूद हेमंत सोरेन सरकार ने सीमित संसाधनों के बीच कई जिलों में पाइपलाइन, जलापूर्ति योजनाओं और गांव-टोला स्तर पर कार्य को आगे बढ़ाया है। यदि कहीं ठेकेदारों या अधिकारियों की अनियमितता सामने आती है, तो राज्य सरकार स्वयं कार्रवाई करती है—लेकिन भाजपा इसे पूरे सिस्टम पर हमला बनाकर पेश कर रही है।

 

आलोक कुमार दुबे ने कहा कि भाजपा के प्रवक्ता जिस गिरिडीह प्रकरण का हवाला दे रहे हैं, उसकी जांच प्रक्रिया पहले से चल रही है। भाजपा यह भूल जाती है कि देश के सबसे बड़े घोटाले—चाहे बैंकिंग हों या इंफ्रास्ट्रक्चर—भाजपा शासित राज्यों और केंद्र की नाक के नीचे हुए हैं। आज वही पार्टी नैतिकता का पाठ पढ़ा रही है।

 

उन्होंने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि “आम आदमी का पानी पीने” का नाटक करने वाली भाजपा पहले यह जवाब दे कि उसकी केंद्र सरकार ने झारखंड को तकनीकी मंजूरी, विशेषज्ञ सहायता और समयबद्ध भुगतान क्यों नहीं दिया। हकीकत यह है कि पूरी योजना का ढांचा ही जाली और अव्यावहारिक है—नाम बदलने से न नल लगते हैं, न पानी आता है।

 

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जल जैसी बुनियादी जरूरत पर राजनीति करना भाजपा की हताशा को दर्शाता है। राज्य सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और जहां भी गड़बड़ी होगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन केंद्र की विफल योजना को राज्य के सिर मढ़कर भाजपा झूठे आरोपों के सहारे जनता को गुमराह नहीं कर सकती।

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