Ranchi: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा मनरेगा में किए गए बदलावों को लेकर दिए गए बयान पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि खट्टर का बयान जमीनी सच्चाई से कोसों दूर और गरीबों को गुमराह करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह “सुधार” नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों में कटौती और जिम्मेदारी से पलायन है, जिसे झूठे दावों और तकनीकी शब्दों के पीछे छिपाया जा रहा है।

 

आलोक कुमार दुबे ने कहा कि मनरेगा का मूल उद्देश्य था—काम मांगने पर काम की गारंटी। लेकिन नए संशोधनों में इसे “नीड-बेस्ड” बताकर काम की कानूनी गारंटी कमजोर की जा रही है। यह बदलाव गरीब मजदूरों के संवैधानिक अधिकार पर सीधा हमला है।उन्होंने स्पष्ट कहा कि 75:25 से 60:40 का अनुपात दिखने में भले “वित्तीय अनुशासन” लगे, लेकिन हकीकत यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। जिन राज्यों के पास पहले से संसाधनों की कमी है, वे 40% अंशदान कैसे देंगे—यह सवाल भाजपा कभी नहीं बताती।

 

दुबे ने GIS टैगिंग और AI के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि तकनीक भ्रष्टाचार का इलाज नहीं, नीयत होती है। जमीनी सच्चाई यह है कि आज भी मजदूरों का भुगतान महीनों अटका रहता है, तकनीक के नाम पर देरी और बहानेबाजी बढ़ी है।उन्होंने रोजगार दिवस 100 से 125 करने के दावे को आंखों में धूल झोंकने वाला प्रचार बताया। दुबे के अनुसार, “जब समय पर काम ही नहीं मिलता और मजदूरी भुगतान में देरी होती है, तो कागजों पर दिन बढ़ाने से पेट नहीं भरता।”

 

मनोहर लाल खट्टर के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि अगर केंद्र को राज्यों की जवाबदेही की इतनी चिंता है, तो केंद्र खुद समय पर फंड जारी क्यों नहीं करता? सच्चाई यह है कि केंद्र की देरी और कटौती के कारण ही मनरेगा दम तोड़ रही है।

 

आलोक कुमार दुबे ने दो टूक कहा कि भाजपा का “विकसित भारत–जी राम जी” नारा गरीब विरोधी नीतियों का नया पैकेज है। कांग्रेस मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का सड़क से संसद तक विरोध करेगी और मजदूरों के हक की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेगी।

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