Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बयान को तथ्यहीन करार दिया है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस तथ्यों के किसी शिक्षाविद् को “भारत-विरोधी” या “अर्बन नक्सल” बताना न केवल बौद्धिक असहिष्णुता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी है।

 

आलोक कुमार दूबे ने स्पष्ट किया कि माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रस्तावित भेंट एक शैक्षणिक संवाद के तहत “सस्टेनेबल डेवलपमेंट” जैसे विषय पर है, न कि किसी राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए। अल्पा शाह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिक्षाविद् हैं और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित संस्था में अकादमिक विमर्श का हिस्सा होना किसी भी तरह राष्ट्र-विरोध नहीं कहा जा सकता।

 

उन्होंने कहा कि किताबों और शोध पर असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन चयनित उद्धरणों के आधार पर देशद्रोह का ठप्पा लगाना अनुचित है। “अकादमिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है,”

 

कांग्रेस महासचिव ने सवाल उठाया कि विकास, आदिवासी कल्याण और सतत विकास जैसे मुद्दों पर वैश्विक अनुभवों से सीखने पर आपत्ति क्यों? “झारखंड के हित में संवाद और ज्ञान-विनिमय आवश्यक है। इसे राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है,”

 

अंत में उन्होंने अपील की कि विपक्ष जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करे, तथ्य सामने रखे और राज्यहित के मुद्दों पर सकारात्मक राजनीति करे—न कि निराधार आरोपों से भ्रम फैलाए।

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