Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने भाजपा नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि बिना तथ्य और प्रमाण के मुख्यमंत्री एवं अधिकारियों पर आरोप लगाना राजनीतिक हताशा का प्रमाण है।
ट्रांसफर-पोस्टिंग एक स्वाभाविक और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जो समय-समय पर नियमों एवं प्रावधानों के तहत की जाती है। इस प्रक्रिया पर बेवजह सवाल उठाना पूरी तरह से पूर्वाग्रह से ग्रसित मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि राज्य में कानून अपना काम स्वतंत्र रूप से कर रहा है। ACB और अन्य जांच एजेंसियां पूरी निष्पक्षता के साथ कार्रवाई कर रही हैं। किसी भी मामले में यदि किसी अधिकारी या व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित है।
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि भाजपा के पास न तो कोई ठोस प्रमाण है और न ही कोई वैधानिक आधार, इसलिए वह सिर्फ मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए अनर्गल आरोप लगा रही है। यह वही भाजपा है, जिसके शासनकाल में देश के कई राज्यों में बड़े-बड़े घोटाले सामने आए, लेकिन वहां जवाबदेही तय नहीं की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी और महागठबंधन सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। लेकिन राजनीतिक द्वेष के तहत किसी व्यक्ति या पद को बदनाम करने की साजिश को जनता समझ चुकी है।
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि विपक्ष को चाहिए कि वह तथ्य आधारित राजनीति करे, न कि जांच एजेंसियों को प्रभावित करने और जनता को भ्रमित करने का प्रयास करे। झारखंड की जनता विकास और सुशासन चाहती है, न कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति।
आलोक कुमार दुबे ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष के पास ट्रांसफर-पोस्टिंग या किसी भी प्रशासनिक विषय को लेकर कोई ठोस और तर्कसंगत अनुशंसा है, तो वे उसे औपचारिक रूप से सरकार के समक्ष प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। सरकार सभी सुझावों पर नियमों के अनुरूप गंभीरता से विचार करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन निराधार बयानबाज़ी से न तो व्यवस्था सुधरती है और न ही लोकतांत्रिक संवाद मजबूत होता है।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ठोस साक्ष्य हैं, तो वह सक्षम मंच पर प्रस्तुत करे। मीडिया ट्रायल और बयानबाजी से न तो न्याय होता है और न ही लोकतंत्र मजबूत होता है।
