Ranchi: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस-2026 के अवसर पर बाल कल्याण संघ द्वारा आयोजित ‘Different Context. Common Aspiration. One Future’ विषयक स्टेकहोल्डर परामर्श में कहा कि बाल तस्करी जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए सरकार, प्रशासन, पुलिस, विद्यालय, पंचायत, सामाजिक संगठनों, समुदाय एवं युवाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि बाल तस्करी और बाल श्रम के पीछे गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी एवं सामाजिक असुरक्षा जैसे अनेक कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल बच्चों को संकट से बाहर निकालना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके सुरक्षित पुनर्वास एवं बेहतर भविष्य की भी सुनिश्चितता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विशेषकर सुदूर ग्रामीण एवं कमजोर क्षेत्रों में बाल संरक्षण के प्रति निरंतर सजगता और जागरूकता आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने स्वयं जीवन में संघर्ष को बहुत निकट से देखा है। उन्होंने कहा कि जब वे लगभग एक वर्ष के थे, तभी उनके पिता जी का स्वर्गवास हो गया था, जीवन बहुत संघर्षों से गुजरा। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में आपातकाल के दौरान जेल जाने के बाद उनका राजनीति में प्रवेश हो गया और उन्हें आठ बार लोकसभा सांसद के रूप में देश की सेवा करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि जीवन के संघर्षों ने उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों की कठिनाइयों और पीड़ा को निकट से समझने का अवसर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि जब वे दिल्ली पहुँचे, तब उन्होंने देखा कि झारखण्ड क्षेत्र के अनेक बच्चे दिल्ली जैसे बड़े शहरों में बच्चे घरेलू कामगार के रूप में कार्य करने के लिए विवश होते थे। ऐसी परिस्थितियों को देखकर उन्हें अत्यंत पीड़ा होती थी। उन्होंने कहा कि समय के साथ स्थिति में सुधार आया है, लेकिन बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा एवं सम्मानजनक जीवन का अवसर उपलब्ध कराने के लिए अभी भी निरंतर प्रयास आवश्यक हैं, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। जो बच्चे किसी कारण से विद्यालय से बाहर हैं, उनकी पहचान कर उन्हें शिक्षा से जोड़ना तथा संकटग्रस्त बच्चों के सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने युवाओं को बाल संरक्षण के प्रयासों का महत्वपूर्ण सहभागी बताते हुए कहा कि युवा अपने गाँव, विद्यालय, महाविद्यालय एवं आसपास के समाज में जागरूकता का प्रभावी संदेश पहुँचा सकते हैं। उन्होंने युवाओं से तकनीक एवं डिजिटल माध्यमों का सकारात्मक उपयोग करते हुए बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा किसी संकटग्रस्त बच्चे की जानकारी उचित माध्यम तक पहुँचाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, शिक्षित एवं स्वस्थ हो तथा उसे आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि बच्चे सुरक्षित होंगे, तो उनका भविष्य सुरक्षित होगा और उनका भविष्य सुरक्षित होगा, तो समाज एवं राष्ट्र और सशक्त होगा।
