Ranchi: झारखंड की सियासत एक बार फिर एमएमडीआर संशोधन अधिनियम (MMDR Amendment Bill) को लेकर गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा एमएमडीआर कानून को लेकर दिए गए बयान के बाद झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कड़ा पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव सह मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने अन्नपूर्णा देवी के बयान को तथ्यहीन और झारखंड विरोधी बताते हुए कहा कि यह बिल सीधे तौर पर राज्य की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना* और गरीब कल्याणकारी योजनाओं पर हमला है।
लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि दरअसल भारतीय जनता पार्टी राज्य की महिलाओं को हर महीने मिल रही सम्मान राशि योजना से बुरी तरह परेशान है। राज्य की लाखों महिलाओं के खाते में सम्मान राशि जा रही है, महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, यही बात भाजपा को हजम नहीं हो रही है। इसीलिए भाजपा की केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से राज्य सरकार को कमजोर करने के लिए उसके राजस्व के स्रोतों पर हमला करने की योजना बनाई है। ताकि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल न बना सके और गरीबों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ न पहुंच सके।
जल, जंगल, जमीन लूटने की साजिश है MMDR बिल
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यह बिल नहीं, बल्कि झारखंड के जल, जंगल और जमीन को लूटने की एक सुनियोजित साजिश है। केंद्र की भाजपा सरकार चाहती है कि झारखंड की खनिज संपदा को लूटकर अपने चुनिंदा पूंजीपति मित्रों को सौंप दिया जाए। राज्य की जनता भाजपा नेताओं की इस साजिश को समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका बदला खुद लेगी।
उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार *एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन* के जरिए खनिज समृद्ध राज्यों, विशेषकर झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों के वित्तीय और संवैधानिक अधिकारों को छीनने की साजिश रच रही है। भारतीय संविधान में यह स्पष्ट है कि खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार संबंधित राज्य की जनता और राज्य सरकार का होता है। लेकिन केंद्र सरकार समान टैक्स और वन नेशन वन टैक्स सिस्टम के नाम पर राज्यों के रॉयल्टी, टैक्स और सेस लगाने के अधिकारों को समाप्त करना चाहती है।
शाहदेव ने कहा कि अगर खनिज संपदा से सेस हटाया जाता है तो झारखंड जैसे खनिज समृद्ध राज्य को हर साल *अरबों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान* होगा। यह पैसा ही राज्य सरकार की मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास, सर्वजन पेंशन और किसानों के लिए चल रही कल्याणकारी योजनाओं में लगता है। सेस हटने से राज्य का खजाना खाली हो जाएगा और सरकार को मजबूरन जनकल्याणकारी योजनाएं बंद करनी पड़ेंगी। यही भाजपा का असली मकसद है।
कॉर्पोरेट मित्रों को फायदा पहुंचाना चाहती है केंद्र सरकार
लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य राज्यों के हित में नीतियां बनाना नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार के चुनिंदा उद्योगपति और कॉर्पोरेट मित्रों को सस्ती दरों पर खदानें सौंपना है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों की सहूलियत के लिए राज्य के जल, जंगल और जमीन की खुली लूट का रास्ता साफ कर रही है। खनन कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए राज्यों के अधिकारों को कुचला जा रहा है, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है।
कोयला चोरी के आरोपों पर करारा जवाब
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा राज्य सरकार पर कोयला चोरी और अवैध खनन को बढ़ावा देने के आरोपों का जवाब देते हुए शाहदेव ने कहा कि भाजपा नेताओं को जानकारी का अभाव है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया, सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल और अन्य सभी कोयला कंपनियां और खदान सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियां जैसे सीआईएसएफ, केंद्र सरकार के अधीन काम करती हैं। खदानों की सुरक्षा और निगरानी की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय कोयला मंत्रालय की है। यदि कहीं भी अवैध खनन या कोयला चोरी की घटना होती है तो इसके लिए सीधे तौर पर केंद्रीय कोयला मंत्रालय जिम्मेदार है। अपनी विफलताओं का ठीकरा राज्य सरकार पर फोड़ना भाजपा की पुरानी आदत बन चुकी है।
अंत में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पर पहले से ही झारखंड का 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये का बकाया फंसा हुआ है। राज्य सरकार लगातार अपना हक मांग रही है, लेकिन केंद्र सरकार पैसा देने के बजाय नए-नए नियम बनाकर राज्य को मिलने वाले राजस्व को रोकने का काम कर रही है। भाजपा चाहती है कि झारखंड विकास न कर सके। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन सरकार झारखंड के हक की लड़ाई दिल्ली से लेकर सड़क तक लड़ेगी और किसी भी कीमत पर राज्य के हितों से समझौता नहीं होने देगी।
