Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने ईडी कार्यालय पर पुलिस प्रशासन द्वारा पूछताछ की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है। संवैधानिक दायरे से बाहर सीमा लांघने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य की पुलिस प्रशासन स्वतंत्र है और ऐसे में भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी का धमकी भरा बयान भ्रामक, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक हताशा से प्रेरित है। विधि सम्मत कार्रवाई ईडी पर हो रही है और छटपटाहट भाजपा के भीतर देखी जा रही है।उन्होंने कहा कि बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के जांच एजेंसियों और राज्य प्रशासन को लेकर आशंकाएं फैलाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
आलोक कुमार दूबे ने स्पष्ट किया कि रांची पुलिस द्वारा ईडी कार्यालय में पूछताछ की कार्रवाई अगर की गई है तो वह पुलिस का संवैधानिक दायित्व है।
कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि यदि ईडी ने कानून की सीमाओं का उल्लंघन किया है, तो पुलिस द्वारा विधिसम्मत पूछताछ करना पूरी तरह संवैधानिक और आवश्यक है। इसके विपरीत भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी द्वारा लगातार दी जा रही धमकीनुमा बयानबाज़ी कानून के राज को कमजोर करने का प्रयास है। झारखंड में कानून का इक़बाल हर हाल में कायम रहेगा और कोई भी संस्था या व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। आज जब आरोप ईडी और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया पर लगते हैं,तो भाजपा के पेट में दर्द क्यों होती है। संवैधानिक संस्थाओं का मज़ाक उड़ाने, उन्हें राजनीतिक औज़ार बनाने या दबाव में लेने की इजाज़त किसी को नहीं दी जा सकती। भाजपा और बाबूलाल मरांडी को चाहिए कि वे धमकी देना बंद करें, लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करें और कानून को अपना काम करने दें।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कभी भी किसी संवैधानिक संस्था या जांच एजेंसी के काम में हस्तक्षेप नहीं किया है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार कानून के दायरे में काम कर रही है और किसी भी एजेंसी को स्वतंत्र रूप से जांच करने से कोई आपत्ति नहीं है। बिना प्रमाण के “साक्ष्य नष्ट होने” जैसे आरोप गढ़ना संस्थाओं के बीच टकराव पैदा करने का प्रयास है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि यदि किसी एजेंसी को सुरक्षा से जुड़ी कोई वास्तविक चिंता है, तो उसके लिए प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं मौजूद हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भय और अविश्वास फैलाना समाधान नहीं है। राज्य पुलिस न तो किसी साक्ष्य से छेड़छाड़ करती है और न ही ऐसा होने देगी।
अंत में उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता जनादेश का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। राज्य को डराने या बदनाम करने की राजनीति को जनता समझती है। झारखंड लोकतंत्र से चलेगा, अफवाहों और धमकियों से नहीं।
