Ranchi: देश की वर्तमान स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए झारखंड कांग्रेस के महासचिव आलोक दुबे ने कहा, देश की वर्तमान स्थिति देखकर गहरी चिंता होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जिस प्रकार गांधी जी और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को लगातार दरकिनार करने का काम किया है, वह हमारे लोकतंत्र और संविधान की आत्मा के खिलाफ है। बाबा साहब ने जिन संवैधानिक मूल्यों, नैतिकता और समानता की बात की थी, आज उनकी खुली अवहेलना हो रही है।
गंभीर बात यह है कि जब-जब किसी राज्य में चुनाव आते हैं, ठीक उसके पहले ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों को सक्रिय कर दिया जाता है। विपक्षी नेताओं पर छापेमारी, गिरफ्तारी और जांच यह साबित करती है कि ये एजेंसियां अब निष्पक्ष जांच का माध्यम नहीं, बल्कि रणनीतिक राजनीतिक हथियार बन चुकी हैं। यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
आलोक दूबे ने कहा मैं यह कोई राजनीतिक आरोप लगाने के लिए नहीं कह रहा हूं, बल्कि इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इससे देश की आम जनता का नुकसान हो रहा है। बंगाल में हाल की घटनाओं को ही देख लीजिए—ईडी और ममता सरकार के बीच की इस खींचतान में किसी का निजी नुकसान नहीं, बल्कि देश की जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी हो रही है।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक महिला मुख्यमंत्री की कुर्सी को हिलाने के लिए केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने से भी नहीं हिचक रही। यह सरकार की महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
ममता बनर्जी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि साहस और आत्मसम्मान क्या होता है। जब ईडी उनके सोशल मीडिया इंचार्ज और राजनीतिक सलाहकार प्रतीक जैन के घर पर कार्रवाई के नाम पर पहुँची, और कोयला घोटाले के दस्तावेज देखने की बात कही, तब सबको यह भली-भांति पता था कि मंशा कुछ और ही थी। ऐसे समय में ममता बनर्जी जी ने जो कदम उठाया, वह ऐतिहासिक और प्रेरणादायक है।
उन्होंने बिना किसी डर के अपनी पार्टी के सभी राजनीतिक दस्तावेज और हार्ड डिस्क, जिनमें उनकी रणनीति और संगठन से जुड़े कागज़ात थे, स्वयं अपने हाथों में लेकर ईडी के सामने से निकल गईं। ईडी देखते रह गई और पूरी दुनिया ने एक मजबूत, निडर और आत्मविश्वासी महिला नेता को देखा। यह केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि यह लोकतंत्र की रक्षा और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ खड़े होने का प्रतीक था।
ममता बनर्जी जी का यह कदम यह संदेश देता है कि सत्ता की ताकत से बड़ा सत्य और साहस होता है। जब नेतृत्व ईमानदार और निडर हो, तो कोई भी एजेंसी या दबाव लोकतांत्रिक मूल्यों को झुका नहीं सकता। यह नारी शक्ति, राजनीतिक स्वाभिमान और संविधान में आस्था का जीवंत उदाहरण है।
मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृहमंत्री अमित शाह जी को केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग तुरंत बंद करना चाहिए। उन्हें राजनीतिक बदले की भावना से नहीं, बल्कि संविधान, नैतिकता और बाबा साहब अंबेडकर के विचारों के अनुरूप देश का संचालन करना चाहिए। यही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।
